Skip to main content

एक्यूप्रेशर द्वारा उपचार :

                   एक्यूप्रेशर द्वारा उपचार :
                            मस्तिष्क

परिचय-
        एक स्वस्थ व्यक्ति के मस्तिष्क का भार लगभग 1300 ग्राम होता है और मस्तिष्क के द्वारा ही शरीर की सारी क्रियाएं संचालित होती है। मस्तिष्क में 3 भाग होते हैं तथा प्रत्येक भाग विभिन्न अंगों को नियंत्रण में रखता है। इन भागों में सुषुम्ना की तीन झिल्लियां होती हैं जिन्हें मस्तिष्कावरण कहते हैं। जब इन झिल्लियों में कोई रोग हो जाता है तो उसे मस्तिष्क का रोग कहते हैं।
मस्तिष्क के निम्नलिखित रोग हो सकते हैं-
1 बेचैनी
2 फोबिया
3 डिप्रेशन
4 हिस्टीरिया
5 मानसिक तनाव।
        इन रोगों का उपचार करने के लिए सबसे पहले यह जानने की जरूरत है कि ये रोग होते क्या हैं तथा इनका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है।
बेचैनी-
        बेचैनी एक प्रकार का मानसिक रोग है जिसमें रोगी के मन में हर समय बेचैनी सी लगती रहती है। इस रोग के कारण रोगी ठीक प्रकार से सोच विचार नहीं कर पाता है, रोगी को नींद बहुत ही कम आती है। रोगी को डर लगता है तथा रात को सोते समय डरावने सपने आते हैं। रोगी के हाथ-पैरों में बहुत पसीना आता है तथा मुंह से आवाज भी बहुत कम निकलती है। इस रोग के कारण कई रोगी तो ठीक प्रकार से खाना भी नहीं खा पाते हैं और कईयों का तो सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। बेचैनी रोग के कारण कई रोगियों की सेक्स के प्रति रुचि खत्म हो जाती है। कई रोगियों को रुक-रुककर दस्त आते हैं तथा उनका पेट भी खराब हो जाता है। बहुत से रोगियों को तो बिना किसी कारण के बेचैनी रोग हो जाता है। ऐसे रोगी छोटी-छोटी बातों से घबरा जाते हैं।अगर इस रोग का सही समय पर इलाज नहीं मिलता है तो मरीज के लिए बहुत ही घातक हो सकता है

बेचैनी रोग होने के कारण-
        बेचैनी रोग पुरुषों से अधिक स्त्रियों को होता है। थाइरॉयड ग्रंथि के अधिक क्रियाशील हो जाने के कारण यह रोग होता है। अधिक सोच-विचार करने वाले कार्य करने के कारण भी यह रोग हो सकता है। इनके अलावा सैक्स सम्बन्धी रोग, मानसिक आघात, कोई दुर्घटना या फिर किसी गंभीर बीमारी के कारण भी यह रोग हो सकता है।
        यदि किसी व्यक्ति को यह रोग हो जाए तो उसे सबसे पहले इस रोग के होने के कारणों को दूर करना चाहिए और फिर इसका उपचार सही तरीके से करना चाहिए। इस रोग से पीड़ित रोगी को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए। संगीत सुनने, मनपसन्द पुस्तकें पढ़ने तथा कई प्रकार के योगासन करने से भी यह रोग ठीक होने लगता है। इस रोग का उपचार एक्यूप्रेशर चिकित्सा से किया जा सकता है।
इस एक्यूप्रेशर प्वाइंट को बार बार दबाने से बेचैनी बीमारी के साथ साथ कुछ और रोग भी ठीक हो सकते है जैसे - मोशन सिकनेस, वॉमिटिंग, पेट में गड़बड़ी, हेडेक, चेस्ट पेन और हाथो के दर्द में बहुत राहत मिलती है

फोबिया-

        फोबिया एक प्रकार का डर से पैदा होने वाला रोग है। जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उसके लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि इस रोग के होने के कारणों का पता लगाकर इसका उपचार सही तरीके से किया जाए। इस रोग के कारण रोगी को अकेले रहने पर या वैसे ही बहुत ज्यादा डर लगने लगता है, रोगी की मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है, सोचने की शक्ति भी कम हो जाती है और कभी-कभी तो रोगी पागलों जैसा व्यवहार करने लगता है। इस रोग का उपचार किसी अच्छे चिकित्सक के द्वारा कराना चाहिए। एक्यूप्रेशर चिकित्सा से यह रोग ठीक किया जा सकता है तथा इस चिकित्सा के द्वारा मानसिक शक्ति को बढ़ाया जा सकता है जिसके फलस्वरूप फोबिया रोग ठीक होने लगता है।

डिप्रेशन-
        डिप्रेशन का रोग आज के समय का एक बहुत ही आम रोग है। इस रोग में रोगी को उदासी तथा मानसिक परेशानी होने लगती है। अगर कुछ समय के लिए कोई व्यक्ति इस रोग से पीड़ित होता है तो उसे डिप्रेशन का रोगी नहीं कह सकते हैं। लेकिन अगर यह रोग रोगी को बार-बार होता रहता है तो उसे डिप्रेशन रोग कहते हैं। डिप्रेशन रोग के कारण रोगी व्यक्ति दिनों-दिन निराश तथा उदास रहने लगता है। रोगी को कुछ भी अच्छा नहीं लगता है तथा उसे कोई न कोई चिंता सताती रहती है। रोगी का किसी काम को करने में मन नहीं लगता है और उसे अपना जीवन बोझ लगने लगता है। इस रोग के कारण रोगी के शरीर में दर्द रहता है। इस रोग के कारण जब रोगी व्यक्ति कोई काम नहीं भी करता है तब भी उसे थकावट सी महसूस होती है।
डिप्रेशन रोग 2 तरह के होता है-
एन्डोजिनस डिप्रेशन-
        एन्डोजिनस डिप्रेशन का रोग व्यक्ति के अन्दर बिना किसी कारण के ही हो जाता है। यह रोग कई बार वाइरल इन्फेक्शन के कारण भी हो सकता है। स्त्रियों में यह रोग शरीर में हार्मोन्स परिवर्तन के कारण होता है।
रिएक्टिव डिप्रेशन-
        रिएक्टिव डिप्रेशन रोग होने के कई कारण होते हैं जैसे- किसी व्यवसाय में बहुत अधिक नुकसान हो जाने पर, किसी बहुत प्यारे व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर या प्यार में असफलता के कारण आदि।
        इस प्रकार का रोग दूसरे कई प्रकार के रोग हो जाने के कारण भी हो सकता है जैसे- मधुमेह सम्बन्धी रोग। वजन घटाने की वजह से, व्यायाम न करने के कारण तथा पौष्टिक भोजन न खाने के कारण भी रिएक्टिव डिप्रेशन का रोग हो सकता है। इनके अलावा यह रोग कई प्रकार की दवाईयों का सेवन करने के कारण भी हो सकता है।
        रिएक्टिव डिप्रेशन रोग हो जाने के कारण रोगी व्यक्ति की शारीरिक शक्ति कम होती जाती है। भूख कम लगना, नींद न आना, पेट खराब होना, कब्ज रहना तथा सिर में दर्द होना आदि लक्षण इस रोग के कारण उत्पन्न हो जाते हैं। इस रोग के कारण रोगी का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। रोगी व्यक्ति को हर समय अकेले रहने का मन करता है और उसे अपने आप से घृणा होने लगती है।
        रिएक्टिव डिप्रेशन रोग का इलाज कराते समय सबसे पहले इस रोग के होने के कारणों को दूर करना चाहिए। इस रोग का उपचार एक्यूप्रेशर चिकित्सा से किया जा सकता है लेकिन उपचार के दौरान रोगी को धैर्य बनाकर रखना चाहिए क्योंकि इस रोग को ठीक होने में कुछ समय लग सकता है।


ये प्वाइंट माथे पर नाक के ऊपर दोनों आइब्रो के बीच में रहता है। यहां दबाने से मानसिक शांति, मेमोरी पॉवर, स्ट्रेस, थकान, हैडेक, आंख में दर्द और नींद की बीमारी में फायदा होता है।

ये प्वाइंट छाती के बीचों बीच रहता है। यहां दबाने से शांति, एंग्जाइटी, नर्वसनेस, डिप्रेशन, हिस्टीरिया और इमोशनल प्रॉबल्म में फायदा होता है।

हिस्टीरिया-

        हिस्टीरिया रोग स्त्रियों को होने वाला रोग है। यह रोग 14 से 25 वर्ष की आयु की लड़कियों को अधिक होता है।
हिस्टीरिया रोग के लक्षण-
        इस रोग से पीड़ित स्त्रियों के सिर में दर्द, छाती में दर्द, रीढ़ की हड्डी में दर्द तथा कन्धों की मांसपेशियों में जकड़न बनी रहती है। इस रोग से पीड़ित स्त्रियां आलसी स्वभाव की, मेहनत न करने वाली, रात को अधिक देर तक जागने वाली, गपशप अधिक करने वाली तथा सुबह के समय में देर से उठने वाली होती है। इस रोग से पीड़ित स्त्रियों के मन में दूसरों के प्रति भ्रमपूर्ण विचार रहते हैं। इस रोग के कारण कभी-कभी स्त्रियों की बोलने की शक्ति कम हो जाती है। इस रोग के अन्य लक्षण भी हैं जैसे- कभी भूख अधिक लगना, कभी भूख कम लगना, पाचनक्रिया खराब होना तथा पेशाब बार-बार आना।
        हिस्टीरिया रोग में स्त्रियों को दौरे पड़ने लगते हैं जो मिर्गी के दौरे से बिल्कुल अलग होते हैं। इस रोग में दौरा पड़ने पर रोगी स्त्री अचानक बेहोश होकर नहीं गिरती, बल्कि अपने आपको संभालकर गिरती है ताकि उसे किसी तरह की चोट न लग जाए। इस रोग का दौरा कभी भी अकेले या एकांत में नहीं पड़ता है और न ही सोये हुए पड़ता है। इस रोग के दौरे के कारण स्त्री बेसुध नहीं होती बल्कि हर समय कुछ बड़बडाती रहती है। इस रोग के दौरे का असर कई घंटों तक बना रह सकता है।
हिस्टीरिया रोग होने का कारण-
        इस रोग के होने का मुख्य कारण लड़कियों द्वारा अपनी इच्छाओं को दबाना होता है। लड़कियों मे यह इच्छाएं प्रेम की, सेक्स की या कोई दूसरी भी हो सकती है जिसे वह अपने अन्दर ही दबा लेती है। वैसे यह रोग अधिकतर लड़कियों में सेक्स की इच्छा पूरी न होने के कारण होता है। शादीशुदा स्त्रियों में यह रोग पति के दुर्व्यवहार तथा मनपंसद साथी न मिलने के कारण हो सकता है। इस रोग से पीड़ित कई स्त्रियों को यह पता नहीं चल पाता है कि यह रोग उन्हें किस कारण से हुआ है।
        जब किसी स्त्री को हिस्टीरिया का दौरा पड़ता है तो उस समय उसके सिर पर गीले तौलिए की पट्टी रखनी चाहिए तथा उसे हवादार जगह पर लिटाना चाहिए। दौरे पड़ने के कुछ समय के बाद उसे पानी पिलाना चाहिए। इस रोग का उपचार एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा किया जा सकता है। एक्यूप्रेशर चिकित्सा में रोगी के हाथों तथा पैरों की अंगुलियों के अगले भाग पर प्रेशर देने से रोगी को होश आ जाता है। अगर दौरे के समाप्त होने के बाद रोगी स्त्री के शरीर में कमजोरी आ जाती है तो उसको दूर करने के लिए उसकी हथेलियों, तलुवों तथा हाथों व पैरों के ऊपर प्रेशर देने से कमजोरी दूर हो जाती है।

मानसिक तनाव

 मस्तिष्क के रोगों के कारण रोगी के मन में हर समय एक तनाव सा बना रहता है तथा रोगी उदास तथा निराश रहने लगता है जिसके कारण रोगी का रोग दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगता है। इसलिए जरूरी है कि रोगी का तनाव दूर किया जाए। इसके बाद उसका उपचार सही तरीके से करना चाहिए। एक्यूप्रेशर चिकित्सा से इलाज करने के लिए रोगी की गर्दन के दोनों ओर ऊपर से नीचे की तरफ हाथ की अंगूठे या अंगुलियों से प्रेशर देना चाहिए।-
        मानसिक परेशानी हो जाने को ही मानसिक तनाव कहते हैं। आज के समय में हर व्यक्ति कई समस्याओं से घिरा हुआ है जिनके कारण  व्यक्ति अक्सर चिंता में डूबा रहता है, इसको ही मानसिक तनाव कहते हैं। आज दफ्तर, घर तथा कारोबार की समस्याओं ने हर इंसान की मानसिक शांति को खत्म कर दिया है जिसके कारण आज का मनुष्य मानसिक तनाव में जी रहा है।
        यह रोग उन लोगों को होता है जो अधिक कमजोर होते हैं तथा जिसका मनोबल मजबूत नहीं होता है। मानसिक रोग को दूर करने के लिए अपने काम में मन लगाना बहुत ही जरूरी है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति का उपचार एक्यूप्रेशर चिकित्सा से हो सकता है तथा इस उपचार के द्वारा रोगी को बहुत आराम मिलता है। एक्यूप्रेशर चिकित्सा से उपचार के साथ-साथ रोगी को सुबह के समय में व्यायाम भी करना चाहिए।


सिर का प्रेशर पॉइंट
    आंखों के बीच वाले बिन्दुओं पर दबाव डालने से बॉडी में मेलाटोनिन हार्मोन स्रावित होता है, जिससे अच्छी नींद आती है। इसके साथ ही तनाव पैदा करने वाला हार्मोन कार्टिसोल का स्त्राव भी नहीं होता। सिर के प्रेशर बिन्दुओं पर यदि नियमित रूप से तीन सेकण्ड तक दबाव डाला जाए तो तेज सिरदर्द से भी आराम मिलता है।



कान के पीछे
        कान की नीचे वाले हिस्से यानी इयर लोब की रोजाना पांच मिनट मालिश करने से तनाव से आराम मिलता है। इसके साथ ही याद्दाश्त भी बढ़ती है। कान के पीछे के झुकाव वाले पॉइंट को दबाने से डिपे्रशन, सिरदर्द, चक्कर और आंख, कान और नाक से जुड़ी बीमारियों में राहत मिलती है।


गर्दन
    गर्दन के प्रेशर पॉइंट को दबाकर भी टेंशन को दूर किया जा सकता है। गर्दन में रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर की मांसपेशियों में दबाव डालें लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि रीढ़ की हड्डी पर दबाव नहीं पड़े। मांसपेशियों पर ही ऊपर-नीचे की तरफ प्रेशर बनाने पर तनाव से राहत मिलती है।


हाथों के प्रेशर पॉइंट
         हाथों की कलाई पर भी ऐसे प्रेशर पॉइंट होते हैं, जिन पर दबाव बनाने से तनाव से आराम मिलता है। दरअसल अंगुली और अंगूठे के बीच बहुत-सी मसल्स होती हैं। हाथ के दोनों तरफ प्रेशर बिंदुओं पर दबाव बनाएं। हाथ को बंद करें और खोले। इससे दबाव बिंदुओं पर दबाव पड़ेगा और तनाव से आराम मिलेगा है


पैरों पर
       पैरों के प्रेशर पॉइंट को दबाने से पीठ दर्द, थकान, सिरदर्द, चिंता, तनाव और अकेलेपन में आश्चर्यजनक आराम मिलता है। पांव के तलवों पर स्थित प्रतिबिम्ब केंद्र पर दबाव देकर रक्त संचार को सुचारू किया जा सकता है। पैरों के तलवों पर दबाव बनाने से बॉडी के सभी हिस्सों को सुचारू किया जा सकता है।



मस्तिष्क के रोगों को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी के दोनों हाथों तथा पैरों में पिट्रयूटरी ग्रंथि, स्नायु-संस्थान, नाभिचक्र, मस्तिष्क, थाइरॉयड, डायाफ्राम तथा आड्रेनल ग्रंथियों से सम्बन्धित प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर प्रेशर देना चाहिए। इससे रोगी को बहुत आराम मिलता है।
मस्तिष्क के बहुत से रोगों को ठीक करने के लिए रोगी के हाथों के अंगूठे से पहली अंगुली के बीच वाले त्रिकोने स्थान पर प्रेशर दें। इसके बाद पैरों तथा हाथों की सारी अंगुलियों पर प्रेशर देने से रोगी को बहुत आराम मिलता है।

        पीठ के पीछे रीढ़ की हड्डी से थोड़ा हटकर ऊपर से नीचे की ओर हाथ के अंगूठे से दिन में 3 बार प्रेशर देने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं तथा दर्द और अकड़न भी दूर हो जाती है। रोजाना इसी प्रकार से प्रेशर देने से रोगी के मानसिक रोग धीरे-धीरे ठीक होने लगते हैं।
        यदि मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति की पाचनशक्ति खराब हो या उसे पेट में कब्ज की शिकायत हो रही हो तो उसके पाचनतंत्र से सम्बन्धित प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर प्रेशर देना चाहिए क्योंकि इन रोगों के कारण भी मस्तिष्क के कई रोग हो सकते हैं। बिन्दुओं पर प्रेशर देने से रोगी की पाचनशक्ति ठीक होकर उसका मानसिक रोग भी ठीक होने लगता है।

मस्तिष्क के रोगों के कारण रोगी के मन में हर समय एक तनाव सा बना रहता है तथा रोगी उदास तथा निराश रहने लगता है जिसके कारण रोगी का रोग दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगता है। इसलिए जरूरी है कि रोगी का तनाव दूर किया जाए। इसके बाद उसका उपचार सही तरीके से करना चाहिए। एक्यूप्रेशर चिकित्सा से इलाज करने के लिए रोगी की गर्दन के दोनों ओर ऊपर से नीचे की तरफ हाथ की अंगूठे या अंगुलियों से प्रेशर देना चाहिए।

एक्यूप्रेशर चिकित्सा से उपचार कराते समय प्रेशर पैरों तथा हाथों के अंगूठों के बाहरी तरफ तथा गर्दन के पीछे जरूर देना चाहिए। इस प्रकार नियमित रूप से प्रेशर देने से रोगी का रोग ठीक होने लगता है। मानसिक रोग ठीक होने में 1 हफ्ते या 1 महीने का समय लग जाता है। यदि रोग ठीक भी हो जाता है तो भी प्रेशर 1-2 महीने तक नियमित रूप से देना चाहिए। एक्यूप्रेशर चिकित्सा से उपचार कराने से रोगी का रोग बहुत ही जल्दी ठीक हो
जाता है। हर रोगी को हाथो पैरो के पॉइंट्स को दबाना चाहिए  प्रतिदिन सभी पॉइंट्स दबाने से कुछ ही हफ्तों में रोगी को आराम मिलता शुरू हो जाता है.

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

क्या आप भी कंधे के दर्द से परेशान हो

घुटनों के दर्द,खिंचाव,लिगामेंट या इंजरी से संबंधित व्यक्ति अवश्य मिले, वीडियो देखने के लिए क्लिक करें

  ‎ 👉 **हमसे जुड़ें और स्वास्थ्य से जुड़ी अधिक जानकारी पाएं:** ‎ ‎*  ऋषि आरोग्य केंद्र, श्री विजयनगर  ☎️ 9779646012 📍 **हमारा पता (Google Maps):** https://maps.app.goo.gl/WfWx8g6j2vfsDrPV7?g_st=ac ‎ ‎ * 🌐 **ब्लॉग (Health Tips):** https://rishiaarogya.blogspot.com ‎ ‎ * 📺 **यूट्यूब चैनल:** https://www.youtube.com/@Rishiaarogy ‎  ‎* 📸 **इंस्टाग्राम:**  https://www.instagram.com/drvinod_health_expert?igsh=MWRsaWs3ZjJxcnczOA== ‎  ‎* 👥 **फेसबुक पेज:** https://www.facebook.com/share/1FCdLY82Sx/ ‎ ‎*  💬 **व्हाट्सएप (Direct Chat):** https://whatsapp.com/dl/

घुटनों के ऑपरेशन के बाद,60 की उम्र में भी कर दिया कमाल , video देखने के लिए क्लिक करे