अशोक वृक्ष
अशोक वृक्ष को हिन्दू धर्म में काफ़ी पवित्र, लाभकारी और विभिन्न मनोरथों को पूर्ण करने वाला माना गया है। अशोक का शब्दिक अर्थ होता है- "किसी भी प्रकार का शोक न होना"। यह पवित्र वृक्ष जिस स्थान पर होता है, वहाँ पर किसी प्रकार का शोक व अशान्ति नहीं रहती। मांगलिक एवं धार्मिक कार्यों में अशोक के पत्तों का प्रयोग किया जाता है। इस वृक्ष पर प्राकृतिक शक्तियों का विशेष प्रभाव माना गया है, जिस कारण यह वृक्ष जिस जगह पर भी उगता है, वहाँ पर सभी कार्य पूर्णतः निर्बाध रूप से सम्पन्न होते चले जाते हैं। इसी कारण अशोक का वृक्ष भारतीय समाज में काफ़ी प्रासंगिक है। भगवान श्रीराम ने भी स्वयं ही इसे शोक दूर करने वाले पेड़ की उपमा दी थी। कामदेव के पंच पुष्प बाणों में एक अशोक भी है। ऐसा कहा जाता है कि जिस पेड़ के नीचे बैठने से शोक नहीं होता, उसे 'अशोक' कहते हैं, अर्थात् जो स्त्रियों के सारे शोकों को दूर करने की शक्ति रखता है, वही अशोक है।
वानस्पतिक परिचय :-
अशोक का वृक्ष हरित वृक्ष आम के समान 25 से 30 फुट तक ऊँचा, बहुत-सी शाखाओं से युक्त घना व छायादार हाता है। देखने में यह मौलश्री के पेड़ जैसा लगता है, परन्तु ऊँचाई में उससे छोटा ही होता है। इसका तना कुछ लालिमा लिए हुए भूरे रंग का होता है। यह वृक्ष सारे भारत में पाया जाता है। इसके पल्लव 9 इंच लंबे, गोल व नोंकदार होते हैं। ये साधारण डण्ठल के व दोनों ओर 5-6 जोड़ों में लगते हैं। कोमल अवस्था में इनका वर्ण श्वेताभ लाल फिर गहरा हरा हो जाता है। पत्ते सूखने पर लाल हो जाते हैं। फल वसंत ऋतु में आते हैं। पहले कुछ नारंगी, फिर क्रमशः लाल हो जाते हैं। ये वर्षा काल तक ही रहते हैं।
अशोक वृक्ष की फलियाँ आठ से दस इंच लंबी चपटी, एक से दो इंच चौड़ी दोनों सिरों पर कुछ टेढ़ी होती है। ये ज्येष्ठ माह में लगती हैं। प्रत्येक में चार से दस की संख्या में बीज होते हैं। फलियाँ पहले जामुनी व पकने पर काले वर्ण की हो जाती हैं। बीज के ऊपर की पपड़ी रक्ताभ वर्ण की, चमड़े के सदृश मोटी होती है। औषधीय प्रयोजन में छाल, पुष्प व बीज प्रयुक्त होते हैं। असली अशोक व सीता अशोक, पेण्डुलर ड्रपिंग अशोक जैसी मात्र बगीचों में शोभा देने वाली जातियों में औषधि की दृष्टि से भारी अंतर होता है। छाल इस दृष्टि से सही प्रयुक्त हो, यह अनिवार्य है। असली अशोक की छाल बाहर से शुभ्र धूसर, स्पर्श करने से खुरदरी अंदर से रक्त वर्ण की होती है। स्वाद में कड़वी होती है। मिलावट के बतौर कहीं-कहीं आम के पत्तों वाले अशोक का भी प्रयोग होता है, पर यह वास्तविक अशोक नहीं है।
प्रकार
अशोक का वृक्ष दो प्रकार का होता है- एक तो असली अशोक वृक्ष और दूसरा उससे मिलता-जुलता नकली अशोक वृक्ष।
असली अशोक वृक्ष
असली अशोक के वृक्ष को लैटिन भाषा में 'जोनेसिया अशोका' कहते हैं। यह आम के पेड़ जैसा छायादार वृक्ष होता है। इसके पत्ते 8-9 इंच लम्बे और दो-ढाई इंच चौड़े होते हैं। इसके पत्ते शुरू में तांबे जैसे रंग के होते हैं, इसीलिए इसे 'ताम्रपल्लव' भी कहते हैं। इसके नारंगी रंग के फूल वसंत ऋतु में आते हैं, जो बाद में लाल रंग के हो जाते हैं। सुनहरी लाल रंग के फूलों वाला होने से इसे 'हेमपुष्पा' भी कहा जाता है।
नकली अशोक वृक्ष
नकली अशोक वृक्ष के पत्ते आम के पत्तों जैसे होते हैं। इसके फूल सफ़ेद, पीले रंग के और फल लाल रंग के होते हैं। यह देवदार जाति का वृक्ष होता है। यह दवाई के काम का नहीं होता।
विभिन्न नाम
अशोक वृक्ष के विभिन्न भाषाओं में नाम भिन्न हैं जो निम्नवत हैं-
औषधीय व धार्मिक गुण
अशोक का वृक्ष अपने विशेष गुणों के लिए भी जाना जाता है। इसके कुछ गुण निम्नलिखित हैं-
रासायनिक गुण
अशोक वृक्ष की छाल में हीमैटाक्सिलिन, टेनिन, केटोस्टेरॉल, ग्लाइकोसाइड, सैपोनिन, कार्बनिक कैल्शियम तथा लौह के यौगिक पाए गए हैं, पर अल्कलॉइड और एसेन्शियल ऑइल की मात्रा बिलकुल नहीं पाई गई। टेनिन एसिड के कारण इसकी छाल सख्त ग्राही होती है, बहुत तेज और संकोचक प्रभाव करने वाली होती है, अतः रक्त प्रदर में होने वाले अत्यधिक रजस्राव पर बहुत अच्छा नियन्त्रण होता है।
वास्तुशास्त्र में उपयोग
अशोक की छाल से आयुर्वेद की उत्कृष्ट दवा '
अशोक के पत्ते के फायदे मासिक धर्म संबंधी विकारों में -
अशोक का प्रयोग स्त्रीरोग की समस्याओं और महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी विकारों के इलाज में किया जाता है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों और एंडोमेट्रियम के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है।
मासिक धर्म के समय बहुत अधिक खून आने की समस्या में अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन कुछ-कुछ देर में कई बार पिएं या फिर अशोक की 8 कोमल पत्तों का रोज़ सुबह सेवन करें।
मासिक धर्म की अनियमितता में भी आप अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर पिएं। इसके उपयोग से मासिक धर्म नियमित हो जाएगा।
अशोक के पेड़ के लाभ योनि से असामान्य खून की समस्या में -
अगर किसी को रक्त प्रदर, योनि से असामान्य खून निकलना, पेशाब से सम्बंधित समस्या है तो अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में दो बार पिएं। इसके सेवन से इन समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।
अशोक का पौधा गर्भाशय को करे मजबूत
अगर किसी को बाँझपन, गर्भाशय की कमजोरी, होर्मोन का असंतुलन, पेट के रोग और पेडू का दर्द जैसी समस्या है तो अशोकारिष्ट का सेवन करें क्योकि अशोकारिष्ट को अशोक के अर्क से बनाया जाता है। इससे आपको इन समस्याओं में फायदा होगा।
गर्भधारण में करता है मदद
जिन महिलाओं को गर्भधारण में समस्या आ रही हैं उन्हें इस पेड़ के पत्ते का सेवन करना चाहिए। दो से तीन ग्राम की मात्रा में अशोक के फूल लेकर इन्हें दही में मिलाकर खाने से गर्भधारक करने में आ रही समस्याएं समाप्त हो जाती हैं और आसानी से गर्भधारण हो सकता है।
अशोक के औषधीय गुण दिलाए लिकोरिया से निजात -
अगर किसी को सफ़ेद पानी आना या लिकोरिया की समस्या है तो 1 चम्मच अशोक की छाल के चूर्ण का प्रतिदिन दो बार गाय के दूध के साथ सेवन करें। इसके सेवन से इन समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।
अशोक वृक्ष के फायदे सूजन करे दूर -
अगर किसी को अंडकोष में सूजन है तो एक सप्ताह तक अशोक के छाल का काढ़ा प्रतिदिन दो बार पिएं। इसके सेवन से अंडकोष की सूजन कम हो जाती है।
अशोक की छाल का काढ़ा पेट में दर्द के लिए -
अगर किसी को पेट में दर्द की समस्या है तो अशोक की छाल को पानी में उबालकर उसका काढा बना लें और प्रतिदिन दो बार पिएं। इससे पेट दर्द से छुटकारा मिलेगा।
अशोक के बीज के फायदे पथरी की समस्या में -
अगर किसी को गुर्दे की पथरी की समस्या है तो अशोक के बीज को पीस लें और प्रतिदिन पांच-दस ग्राम की मात्रा का ठंडे पानी के साथ सेवन करें। इसके सेवन से पथरी की समस्या से निजात मिलेगा
अशोक के फायदे करे दूर सांस रोग को -
अगर किसी को सांस रोग की समस्या है तो अशोक के बीजों का 65 मिली ग्राम चूर्ण पान के बीड़े में रख कर सेवन करें। इसके सेवन से कुछ ही दिनों में सांस रोग से छुटकारा मिल जाएगा।
अशोक की छाल का चूर्ण हड्डी के लिए -
अगर किसी कि हड्डी टूट गई है तो अशोक की छाल का पांच से दस ग्राम चूर्ण प्रतिदिन दो बार दूध के साथ लें। इसके सेवन से हड्डी काफी जल्दी जुड़ जाती है।
अशोक के फूल का लाभ खूनी पेचिश में -
अगर कोई खूनी पेचिश से परेशान है तो 3-4 ग्राम अशोक के फूल को पीस के पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलेगा।
अशोक की छाल का उपयोग करे बवासीर को दूर -
बहुत से लोगों को खूनी बवासीर की समस्या से निजात पाने के लिए 5 ग्राम अशोक की छाल और 5 ग्राम अशोक के फूल को रात भर एक गिलास पानी में भिगोने के लिए छोड़ देना चाहिए। सुबह इसे छान कर पी लें। इसी प्रकार सुबह भिगो कर शाम को पिएं। इसके सेवन से खूनी बवासीर की समस्या में आराम मिलेगा।
अशोक की छाल से करें ढीली योनि को टाइट -
अगर आप अपनी योनि के ढीलेपन से परेशान है तो अशोक की छाल, बबूल छाल, गूलर छाल, माजूफल और फिटकरी को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। फिर इसे किसी सूती कपड़े से छान कर इसका पाउडर बना लें। इस पाउडर की सौ ग्राम की मात्रा एक लीटर पानी में उबालें। जब एक चौथाई बच जाए तो इसे ठंडा कर के रात को योनि के अन्दर डालें। इसका प्रयोग कुछ दिन तक लगातार करें।
अशोक के पेड़ का महत्व त्वचा के लिए -
अशोक का उपयोग त्वचा के रंग में सुधार करता है। यह रक्त को शुद्ध करता है और त्वचा की एलर्जी को दूर रखने में मदद करता है। यह विषाक्त पदार्थ को निकालने और रंग को साफ करने का काम करता है। इसके अलावा अशोक का उपयोग त्वचा की जलन को भी शांत करने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए अशोका फूलों और पत्ते को पीसकर पेस्ट बना लें और प्रभावित त्वचा पर रगड़ें।
अशोक की छाल के लाभ जोड़ो के दर्द से दिलाए राहत -
अशोक का उपयोग दर्द से राहत पाने में भी लाभदायक है। इसे सुरक्षित रूप से एनाल्जेसिक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। जोड़ो के दर्द के लिए इसके छाल को पीस कर पेस्ट बना लें और उपयोग करें।
अशोक के अन्य फायदे -
अशोक के पेड़ के नुकसान -
अशोक वृक्ष को हिन्दू धर्म में काफ़ी पवित्र, लाभकारी और विभिन्न मनोरथों को पूर्ण करने वाला माना गया है। अशोक का शब्दिक अर्थ होता है- "किसी भी प्रकार का शोक न होना"। यह पवित्र वृक्ष जिस स्थान पर होता है, वहाँ पर किसी प्रकार का शोक व अशान्ति नहीं रहती। मांगलिक एवं धार्मिक कार्यों में अशोक के पत्तों का प्रयोग किया जाता है। इस वृक्ष पर प्राकृतिक शक्तियों का विशेष प्रभाव माना गया है, जिस कारण यह वृक्ष जिस जगह पर भी उगता है, वहाँ पर सभी कार्य पूर्णतः निर्बाध रूप से सम्पन्न होते चले जाते हैं। इसी कारण अशोक का वृक्ष भारतीय समाज में काफ़ी प्रासंगिक है। भगवान श्रीराम ने भी स्वयं ही इसे शोक दूर करने वाले पेड़ की उपमा दी थी। कामदेव के पंच पुष्प बाणों में एक अशोक भी है। ऐसा कहा जाता है कि जिस पेड़ के नीचे बैठने से शोक नहीं होता, उसे 'अशोक' कहते हैं, अर्थात् जो स्त्रियों के सारे शोकों को दूर करने की शक्ति रखता है, वही अशोक है।
वानस्पतिक परिचय :-
अशोक का वृक्ष हरित वृक्ष आम के समान 25 से 30 फुट तक ऊँचा, बहुत-सी शाखाओं से युक्त घना व छायादार हाता है। देखने में यह मौलश्री के पेड़ जैसा लगता है, परन्तु ऊँचाई में उससे छोटा ही होता है। इसका तना कुछ लालिमा लिए हुए भूरे रंग का होता है। यह वृक्ष सारे भारत में पाया जाता है। इसके पल्लव 9 इंच लंबे, गोल व नोंकदार होते हैं। ये साधारण डण्ठल के व दोनों ओर 5-6 जोड़ों में लगते हैं। कोमल अवस्था में इनका वर्ण श्वेताभ लाल फिर गहरा हरा हो जाता है। पत्ते सूखने पर लाल हो जाते हैं। फल वसंत ऋतु में आते हैं। पहले कुछ नारंगी, फिर क्रमशः लाल हो जाते हैं। ये वर्षा काल तक ही रहते हैं।
अशोक वृक्ष की फलियाँ आठ से दस इंच लंबी चपटी, एक से दो इंच चौड़ी दोनों सिरों पर कुछ टेढ़ी होती है। ये ज्येष्ठ माह में लगती हैं। प्रत्येक में चार से दस की संख्या में बीज होते हैं। फलियाँ पहले जामुनी व पकने पर काले वर्ण की हो जाती हैं। बीज के ऊपर की पपड़ी रक्ताभ वर्ण की, चमड़े के सदृश मोटी होती है। औषधीय प्रयोजन में छाल, पुष्प व बीज प्रयुक्त होते हैं। असली अशोक व सीता अशोक, पेण्डुलर ड्रपिंग अशोक जैसी मात्र बगीचों में शोभा देने वाली जातियों में औषधि की दृष्टि से भारी अंतर होता है। छाल इस दृष्टि से सही प्रयुक्त हो, यह अनिवार्य है। असली अशोक की छाल बाहर से शुभ्र धूसर, स्पर्श करने से खुरदरी अंदर से रक्त वर्ण की होती है। स्वाद में कड़वी होती है। मिलावट के बतौर कहीं-कहीं आम के पत्तों वाले अशोक का भी प्रयोग होता है, पर यह वास्तविक अशोक नहीं है।
प्रकार
अशोक का वृक्ष दो प्रकार का होता है- एक तो असली अशोक वृक्ष और दूसरा उससे मिलता-जुलता नकली अशोक वृक्ष।
असली अशोक वृक्ष
असली अशोक के वृक्ष को लैटिन भाषा में 'जोनेसिया अशोका' कहते हैं। यह आम के पेड़ जैसा छायादार वृक्ष होता है। इसके पत्ते 8-9 इंच लम्बे और दो-ढाई इंच चौड़े होते हैं। इसके पत्ते शुरू में तांबे जैसे रंग के होते हैं, इसीलिए इसे 'ताम्रपल्लव' भी कहते हैं। इसके नारंगी रंग के फूल वसंत ऋतु में आते हैं, जो बाद में लाल रंग के हो जाते हैं। सुनहरी लाल रंग के फूलों वाला होने से इसे 'हेमपुष्पा' भी कहा जाता है।
नकली अशोक वृक्ष
नकली अशोक वृक्ष के पत्ते आम के पत्तों जैसे होते हैं। इसके फूल सफ़ेद, पीले रंग के और फल लाल रंग के होते हैं। यह देवदार जाति का वृक्ष होता है। यह दवाई के काम का नहीं होता।
विभिन्न नाम
अशोक वृक्ष के विभिन्न भाषाओं में नाम भिन्न हैं जो निम्नवत हैं-
- संस्कृत- अशोक
- हिन्दी- अशोक
- मराठी- अशोपक
- गुजराती- आसोपालव
- बंगाली- अस्पाल, अशोक
- तेलुगू- अशोकम्
- तमिल- अशोघम
- अंग्रेज़ी- Saraca asoca (सराका असोक)
- लैटिन- जोनेसिया अशोका।
औषधीय व धार्मिक गुण
अशोक का वृक्ष अपने विशेष गुणों के लिए भी जाना जाता है। इसके कुछ गुण निम्नलिखित हैं-
- अशोक का वृक्ष शीतल, कड़वा, ग्राही, वर्ण को उत्तम करने वाला, कसैला और वात-पित्त आदि दोष, अपच, तृषा, दाह, कृमि, शोथ, विष तथा रक्त विकार नष्ट करने वाला है। यह रसायन और उत्तेजक है।
- इस वृक्ष का क्वाथ गर्भाशय के रोगों का नाश करता है, विशेषकर रजोविकार को नष्ट करता है। इसकी छाल रक्त प्रदर रोग को नष्ट करने में उपयोगी होती है।
- माना जाता है कि अशोक वृक्ष घर में लगाने से या इसकी जड़ को शुभ मुहूर्त में धारण करने से मनुष्य को सभी शोकों से मुक्ति मिल जाती है।
- अशोक के फल एवं छाल को उबालकर पीने से स्त्रियों को कई रोगों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही यह सौंदर्य में भी वृद्धि करता है।
- इसकी छाल को उबालकर पीने से कई तरह के चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है।
- यदि व्यक्ति किसी महत्त्वपूर्ण कार्य से जा रहा है तो अशोक वृक्ष का एक पत्ता अपने सिर पर धारण करके जाए, इससे कार्य में अवश्य सफलता मिलेगी।
- अशोक वृक्ष
- अशोक के वृक्ष की जड़ शुभ मुहूर्त में लाकर विधिपूर्वक पूजन कर धारण करें या पूजा स्थल में रखें, तो धन की कमी नहीं होती।
- इस वृक्ष को लगाने और उसको सींचने से धन में वृद्धि होती है।
- यदि अशोक वृक्ष की जड़ को तांबे के ताबीज में भरकर विधिपूर्वक धारण किया जाए, तो हर असंभव कार्य पूर्ण होने की संभावना बढ़ जाएगी।
- इस वृक्ष को प्रतिदिन जल देने से मनुष्य की सारी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।
- इस वृक्ष के बीज, पत्ते एवं छाल को पीसकर लेप लगाने से सौंदर्य वृद्धि होती है।
- इसके बीज या फूल को शहद के साथ मिलाकर खाया जाए, तो कई व्याधियाँ दूर होती हैं।
रासायनिक गुण
अशोक वृक्ष की छाल में हीमैटाक्सिलिन, टेनिन, केटोस्टेरॉल, ग्लाइकोसाइड, सैपोनिन, कार्बनिक कैल्शियम तथा लौह के यौगिक पाए गए हैं, पर अल्कलॉइड और एसेन्शियल ऑइल की मात्रा बिलकुल नहीं पाई गई। टेनिन एसिड के कारण इसकी छाल सख्त ग्राही होती है, बहुत तेज और संकोचक प्रभाव करने वाली होती है, अतः रक्त प्रदर में होने वाले अत्यधिक रजस्राव पर बहुत अच्छा नियन्त्रण होता है।
वास्तुशास्त्र में उपयोग
- अशोक का वृक्ष घर में उत्तर दिशा में लगाना चाहिए, जिससे गृह में सकारात्मक ऊर्जा का संचारण बना रहता है। घर में अशोक के वृक्ष होने से सुख, शान्ति एवं समृद्धि बनी रहती है एवं अकाल मृत्यु नहीं होती।
- परिवार की महिलाओं को शारीरिक व मानसिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। यदि महिलायें अशोक के वृक्ष पर प्रतिदिन जल अर्पित करती रहें तो उनकी इच्छाएँ एवं वैवाहिक जीवन में सुखद वातावरण बना रहता है।
- छात्रों की स्मरण शक्ति के लिए अशोक की छाल तथा ब्रहमी समान मात्रा में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह शाम एक गिलास हल्के गर्म दूध के साथ सेवन करने से शीघ्र ही लाभ मिलेगा।
अशोक की छाल से आयुर्वेद की उत्कृष्ट दवा '
- अशोकारिष्ट ' बनाई जाती है। यह स्त्री रोगों , श्वेत प्रदर , रक्त प्रदर , गर्भाशय की कमजोरी, हार्मोन के असंतुलन , गर्भाशय में गांठ , माहवारी के समय दर्द और अधिक रक्तस्राव आदि में काम आती है। गर्भाशय को मजबूत करने के लिए टॉनिक बनाने में इसका उपयोग किया जाता है
- अशोक की छाल रक्तपित्त , खुनी बवासीर तथा मूत्र रोगों की दवा बनाने में काम आती है।
- अशोक की छाल डिसेंट्री , वात के कारण शरीर में दर्द , स्किन की एलर्जी आदि के उपचार में काम आती है।
- यह त्वचा का रंग उजला बनाती है , सूजन दूर करती है तथा रक्त विकार दूर करती है।
- बिच्छू के डंक मारने पर अशोक की छाल लगाई जाती है , जो दर्द कम करती है।
- इसके उपयोग से अशोक धृत भी बनाया जाता है। जो टॉनिक के रूप में दिया जाता है।
- योनि की शिथिलता दूर करके योनि को टाइट करने के लिए अशोक की छाल का उपयोग किया जाता है।
- अशोक के सूखे फूल का पाउडर डायबिटीज में लाभदायक होता है।
- अशोक के बीज गुर्दे की पथरी और पेशाब सम्बन्धी बीमारी में काम आते हैं।
अशोक के पत्ते के फायदे मासिक धर्म संबंधी विकारों में -
अशोक का प्रयोग स्त्रीरोग की समस्याओं और महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी विकारों के इलाज में किया जाता है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों और एंडोमेट्रियम के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है।
मासिक धर्म के समय बहुत अधिक खून आने की समस्या में अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन कुछ-कुछ देर में कई बार पिएं या फिर अशोक की 8 कोमल पत्तों का रोज़ सुबह सेवन करें।
मासिक धर्म की अनियमितता में भी आप अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर पिएं। इसके उपयोग से मासिक धर्म नियमित हो जाएगा।
अशोक के पेड़ के लाभ योनि से असामान्य खून की समस्या में -
अगर किसी को रक्त प्रदर, योनि से असामान्य खून निकलना, पेशाब से सम्बंधित समस्या है तो अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में दो बार पिएं। इसके सेवन से इन समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।
अशोक का पौधा गर्भाशय को करे मजबूत
अगर किसी को बाँझपन, गर्भाशय की कमजोरी, होर्मोन का असंतुलन, पेट के रोग और पेडू का दर्द जैसी समस्या है तो अशोकारिष्ट का सेवन करें क्योकि अशोकारिष्ट को अशोक के अर्क से बनाया जाता है। इससे आपको इन समस्याओं में फायदा होगा।
गर्भधारण में करता है मदद
जिन महिलाओं को गर्भधारण में समस्या आ रही हैं उन्हें इस पेड़ के पत्ते का सेवन करना चाहिए। दो से तीन ग्राम की मात्रा में अशोक के फूल लेकर इन्हें दही में मिलाकर खाने से गर्भधारक करने में आ रही समस्याएं समाप्त हो जाती हैं और आसानी से गर्भधारण हो सकता है।
अशोक के औषधीय गुण दिलाए लिकोरिया से निजात -
अगर किसी को सफ़ेद पानी आना या लिकोरिया की समस्या है तो 1 चम्मच अशोक की छाल के चूर्ण का प्रतिदिन दो बार गाय के दूध के साथ सेवन करें। इसके सेवन से इन समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।
अशोक वृक्ष के फायदे सूजन करे दूर -
अगर किसी को अंडकोष में सूजन है तो एक सप्ताह तक अशोक के छाल का काढ़ा प्रतिदिन दो बार पिएं। इसके सेवन से अंडकोष की सूजन कम हो जाती है।
अशोक की छाल का काढ़ा पेट में दर्द के लिए -
अगर किसी को पेट में दर्द की समस्या है तो अशोक की छाल को पानी में उबालकर उसका काढा बना लें और प्रतिदिन दो बार पिएं। इससे पेट दर्द से छुटकारा मिलेगा।
अशोक के बीज के फायदे पथरी की समस्या में -
अगर किसी को गुर्दे की पथरी की समस्या है तो अशोक के बीज को पीस लें और प्रतिदिन पांच-दस ग्राम की मात्रा का ठंडे पानी के साथ सेवन करें। इसके सेवन से पथरी की समस्या से निजात मिलेगा
अशोक के फायदे करे दूर सांस रोग को -
अगर किसी को सांस रोग की समस्या है तो अशोक के बीजों का 65 मिली ग्राम चूर्ण पान के बीड़े में रख कर सेवन करें। इसके सेवन से कुछ ही दिनों में सांस रोग से छुटकारा मिल जाएगा।
अशोक की छाल का चूर्ण हड्डी के लिए -
अगर किसी कि हड्डी टूट गई है तो अशोक की छाल का पांच से दस ग्राम चूर्ण प्रतिदिन दो बार दूध के साथ लें। इसके सेवन से हड्डी काफी जल्दी जुड़ जाती है।
अशोक के फूल का लाभ खूनी पेचिश में -
अगर कोई खूनी पेचिश से परेशान है तो 3-4 ग्राम अशोक के फूल को पीस के पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलेगा।
अशोक की छाल का उपयोग करे बवासीर को दूर -
बहुत से लोगों को खूनी बवासीर की समस्या से निजात पाने के लिए 5 ग्राम अशोक की छाल और 5 ग्राम अशोक के फूल को रात भर एक गिलास पानी में भिगोने के लिए छोड़ देना चाहिए। सुबह इसे छान कर पी लें। इसी प्रकार सुबह भिगो कर शाम को पिएं। इसके सेवन से खूनी बवासीर की समस्या में आराम मिलेगा।
अशोक की छाल से करें ढीली योनि को टाइट -
अगर आप अपनी योनि के ढीलेपन से परेशान है तो अशोक की छाल, बबूल छाल, गूलर छाल, माजूफल और फिटकरी को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। फिर इसे किसी सूती कपड़े से छान कर इसका पाउडर बना लें। इस पाउडर की सौ ग्राम की मात्रा एक लीटर पानी में उबालें। जब एक चौथाई बच जाए तो इसे ठंडा कर के रात को योनि के अन्दर डालें। इसका प्रयोग कुछ दिन तक लगातार करें।
अशोक के पेड़ का महत्व त्वचा के लिए -
अशोक का उपयोग त्वचा के रंग में सुधार करता है। यह रक्त को शुद्ध करता है और त्वचा की एलर्जी को दूर रखने में मदद करता है। यह विषाक्त पदार्थ को निकालने और रंग को साफ करने का काम करता है। इसके अलावा अशोक का उपयोग त्वचा की जलन को भी शांत करने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए अशोका फूलों और पत्ते को पीसकर पेस्ट बना लें और प्रभावित त्वचा पर रगड़ें।
अशोक की छाल के लाभ जोड़ो के दर्द से दिलाए राहत -
अशोक का उपयोग दर्द से राहत पाने में भी लाभदायक है। इसे सुरक्षित रूप से एनाल्जेसिक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। जोड़ो के दर्द के लिए इसके छाल को पीस कर पेस्ट बना लें और उपयोग करें।
अशोक के अन्य फायदे -
- अशोक वृक्षों के सूखे फूल मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी होते हैं। इसके सेवन से मधुमेह की समस्या में राहत मिलती है।
- अशोक पेट के कीड़ों से छुटकारा दिलाने में भी काफी लाभदायक है। इसके लिए अशोक के पत्ते या छाल का सेवन करें। यह पेट को साफ़ करता है और दर्द से निजात दिलाता है।
- अशोक वृक्ष बिना किसी दुष्प्रभाव के आपके दस्त का इलाज करने में भी लाभदायक है। अशोक वृक्ष की पत्तियों, फूलों और छाल को एक टॉनिक के रूप में उपयोग करें। यह दस्त की समस्या को दूर करेगा।
अशोक के पेड़ के नुकसान -
- अशोक का दवा की मात्रा में प्रयोग शरीर पर कोई हानिप्रद प्रभाव नहीं डालता।
- लेकिन यह एमेनोरिया - मासिकधर्म के ना होने को और बिगाड़ देता है।
- हृदय रोग के मरीज को इस जड़ी-बूटी को लेने से पहले चिकित्सा से परामर्श लेना चाहिए।
- अशोक वृक्ष का उपयोग गर्भवती महिलाओं को नहीं करना चाहिए क्योंकि उनके लिए यह हानिकारक हो सकता है।








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