अल्सर या ग्रहणी के सुरक्षात्मक अस्तर में दरार(ब्रेक) या छेद होते हैं। ड्यूडिनल अल्सर पेट के अल्सर की तुलना में अधिक आम होता हैं। तुलनात्मक रूप से असामान्य, एसोफैगल अल्सर, जो अन्नप्रणाली (निगलने वाली ट्यूब) में बनता है, अक्सर कुछ एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं और एंटीबायोटिक दवाओं जैसे अल्कोहल के दुरुपयोग या दवाओं के संपर्क में होता है।
जबकि अतिरिक् एसिड का स्राव अल्सर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, हाल ही में एक शोध में, यह भी पाया गया है कि जीवाणु संक्रमण अल्सर का एक और प्रमुख कारण होता है। ऐसे चिकित्सा प्रमाण हैं कि हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (एच. पाइलोरी) बैक्टीरिया पेट के अल्सर के 80% से अधिक और ग्रहणी संबंधी अल्सर के 90% से अधिक में मौजूद होते हैं।
1.पेट में अल्सर (छाले) के प्रकार -
2.पेट में अल्सर (छाले) होने के लक्षण -
3.पेट में छाले (अल्सर) के कारण -
4.पेट में छाले (अल्सर) से बचाव -
5.पेट में अल्सर (छाले) का परीक्षण -
6.पेट में अल्सर (छाले) का इलाज -
7.पेप्टिक अल्सर में क्या खाना चाहिए? -
8.पेट में अल्सर (छाले) की दवा -
अल्सर के प्रकार क्या हैं?
अल्सर के निम्नलिखित प्रकार हैं:
1.पेप्टिक अल्सर:
पेप्टिक अल्सर को हम गैस्ट्रिक अल्सर के नाम से भी जानते हैं। ये एक तरह से हमारे पेट के भीतरी परत में संक्रमित घाव होते हैं।
पेट में आंत के बाहरी हिस्से में भी ये अल्सर संक्रमित हो सकते हैं। इस तरह के अल्सर को डूआडनल अल्सर भी कहा जाता है। पेट के अल्सर और डूआडनल अल्सर दोनो को पेप्टिक अल्सर भी कहा जाता है।
पेप्टिक अल्सर एक तरह का घाव है जो कि पेट के भीतरी हिस्से की परत में, भोजन नली में और छोटी आंत में विकसित होते हैं। पेप्टिक अल्सर के दौरान पेट में दर्द होता है और ये दर्द नाभी से लेकर छाती तक महसूस होता है, ये पेप्टिक अल्सर के सबसे सामान्य लक्षण माने जाते हैं। अगर इस अल्सर का इलाज समय रहते न किया जाए तो ये और भी ख़तरनाक हो सकता है और अपने साथ कई अन्य बिमारियों को भी जन्म दे सकता है। औमतौर पर हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैकटीरिया कि वजह से हमारे शरीर में सूजन होती है तथा पेट से अम्ल का क्षरण भी होता है। पेप्टिक अल्सर एक सामान्य बिमारी है।
ये पेट के अंदरूनी अस्तर और छोटी आंत या घुटकी के ऊपरी हिस्से में विकसित होते हैं। जब पाचन रस पेट या आंत के अस्तर को नुकसान पहुंचाते हैं, वे बनते हैं। एच. पाइलोरी द्वारा संक्रमित होने और दर्द निवारक दवाओं के लंबे समय तक उपयोग के बाद सूजन के कारण ये अक्सर होते हैं।
पेप्टिक अल्सर एक तरह का घाव है जो कि पेट के भीतरी हिस्से की परत में, भोजन नली में और छोटी आंत में विकसित होते हैं। पेप्टिक अल्सर के दौरान पेट में दर्द होता है और ये दर्द नाभी से लेकर छाती तक महसूस होता है, ये पेप्टिक अल्सर के सबसे सामान्य लक्षण माने जाते हैं। अगर इस अल्सर का इलाज समय रहते न किया जाए तो ये और भी ख़तरनाक हो सकता है और अपने साथ कई अन्य बिमारियों को भी जन्म दे सकता है। औमतौर पर हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैकटीरिया कि वजह से हमारे शरीर में सूजन होती है तथा पेट से अम्ल का क्षरण भी होता है। पेप्टिक अल्सर एक सामान्य बिमारी है।
पेट में अल्सर (छाले) होने के लक्षण -
पेप्टिक अल्सर के लक्षण निम्नलिखित हैं
- पेट में दर्द पेप्टिक अल्सर का मुख्य लक्षण है। आमतौर पर अल्सर के लक्षण नहीं होते, हालांकि रक्तस्त्राव अल्सर का सबसे पहला संकेत माना जाता है।
- अल्सर का दर्द आमतौर पर पेट के ऊपरी मध्य भाग में होता है यह दर्द नाभी के ऊपर और छाती के नीचे होता है।
- अल्सर कि वजह से पेट मे जलन, दांत काटने जैसा दर्द, ये दर्द हमारे पीछे के हिस्से में भी हो सकता है।
- आमतौर पर पेट में दर्द तब होता है जब खाना खाने के कई घन्टे के बाद तक हमारा पेट खाली रहता है।
- खासकर रात और सुबह के समय यह दर्द ज्यादा प्रभावी हो जाता है।
अल्सर के दौरान होने वाला दर्द कुछ मिनटों से लेकर कई घंटो तक भी जारी रह सकता है।
अल्सर के दर्द में भोजन, एंटासिड्स, या उल्टी से राहत मिल सकती है।
पेप्टिक अल्सर के कुछ और लक्षण निम्नलिखित हैं
- जी मिचलाना -
- उल्टी आना -
- भूख न लगना -
- वजन कम हो जाना -
अधिकांश अल्सर के मामलों में पेट में रक्तस्त्राव होता है। हालांकि कभी-कभी केवल रक्तस्त्राव ही अल्सर का लक्षण होता है।रक्तस्त्राव कभी तेज तो कभी धीमी गति से होता है। हालांकि तेज़ रक्तस्त्राव का पता इन वजहों से पता चलता है।
उल्टी के साथ ख़ून का बहार आना या कॉफ़ी कि तरह का काला पदार्थ बाहर आना। अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है इसका मतलब है कि बिल्कुल भी लापारवाही न करें और बिना देर किए अस्पताल के एमर्जेंसी वॉर्ड में जाएं।
मल के साथ काले रंग का ख़ून, चिपचिपा दिखने वाला मल आना।
पेट में अल्सर (छाले) का परीक्षण -
पेप्टिक अल्सर या पेट के अल्सर का निदान
डॉक्टर किस तरह करते हैं पेप्टिक अल्सर का निदान, आइए जानते हैं
सबसे पहले डॉक्टर हमारी पिछिली चिकित्सा संबधी जानकारी के बारे में जानते हैं, शरीरिक स्थिति को देखते हैं और कुछ टेस्ट भी करते हैं।
एंडोस्कोपी या एक्स-रे टेस्ट
इन दोनों टेस्ट्स द्वारा पेप्टिक अल्सर का पता लगाया जाता है।
पिछिली चिकित्सा संबधी जानकारी
पेप्टिक अल्सर के निदान और मदद के लिए डॉक्टर लक्षण तथा पिछली दवाओं के बारे में प्रश्न पूछ सकते हैं। जिन दवाओं का उपयोग आपने बिना डॉक्टर की सलाह के किया हो उन्हें जरुर डॉक्टर से साझा करें। खासकर नॉन-स्टेरायडल एंटी इनफ्लेमेंट्री ड्रग्स जैसे ऐस्परिन, आईब्यूप्रोफेन, नेपरोक्सन आदि ।
पेप्टिक अल्सर के लिए शरीरिक परीक्षण
अल्सर के निदान में हमारा शरिरिक परिक्षण डॉक्टर के लिए मददग़ार हो सकता है। हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैकटीरिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर परीक्षण के दौरान इन सब के बारे में जांच कर सकते हैं जैसे पेट में सूजन के लिए जांच, हमारे पेट कि आवाज़ को स्टेथस्कोप कि सहायता से सुनने कि कोशिश करते हैं और टेब का इस्तेमाल करके पेट के दर्द और पेट कि कठोरता और नरमीं को जानने कि कोशिश करते हैं।
पेप्टिक अल्सर के लिए लैब टेस्ट
अगर आप हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैकटीरिया से संक्रमित हैं तो डॉक्टर इन टेस्टों के लिए आपको सलाह दे सकते हैं।
लैब टेस्ट तीन प्रकार के होते हैं
- ख़ून की जांच
- यूरिया ब्रेथ टेस्ट
- मल परीक्षण
1. खून की जांच (ब्लड टेस्ट)
इस परीक्षण में हमारे ख़ून का सैम्पल लिया जाता है और ये देखा जाता है कि हमारे खून में संक्रमण का स्तर सामान्य है या उससे नीचे ।
2. यूरिया ब्रेथ टेस्ट
इस टेस्ट में मरीज को एक विशेष तरह का पेय पदार्थ पिलाया जाता है, इस पेय कि वजह से हमारे शरीर में प्रोटीन का विभाजन होता है और अगर मरीज के शरीर में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैकटीरिया उपस्थित होते हैं तो, ये इस अपशिष्ट उत्पाद को कार्बन-डाइऑक्साइड में बदल देते हैं और जब हम सांस छोड़ते हैं तो ये दिखाई देते हैं। उसके बाद हमारी सांस का सैम्पल लिया जाता है और उसके परिक्षण के लिए लैब में भेजा जाता यदि मरीज के सैंम्पल में कार्बन डाइऑक्साइड अधिक मात्रा में पाया जाता है तो इसका मतलब हमारे पेट में या आंत में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैकटीरिया उपस्थित हैं।
3. मल परीक्षण
मल परीक्षण में मरीज के मल को डॉक्टर लैब में भेजता है और उसका परीक्षण किया जाता है। मल में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैकटीरिया का पता लगाया जाता है।
पेप्टिक अल्सर के परीक्षण के दो और तरीक़े
अपर गैस्ट्रोइन्टेस्टनल एंडोस्कोपी एवं बायोप्सी
कम्प्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी
अपर गैस्ट्रोइन्टेस्टनल एंडोस्कोपी और बायोप्सी में अपर जीआई एन्डोस्कोपी टेस्ट के दौरान डॉक्टर (गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट), सर्जन या कोई अन्य प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवर एन्डोस्कोप का उपयोग कर रोगी के जी.आई. ट्रैक्ट को भीतर से जानने का प्रयास करते हैं यह पूरी प्रक्रिया अस्पताल में होती है। टेस्ट के दौरान शिरा इंजेक्सन को रोगी के बांह में लागाया जाता है तथा सीडेटिव जो कि इस एन्डोस्कोपी टेस्ट के दौरान रोगी को राहत पहुंचाता है। अगर किसी कारण बस रोगी को बेहोशी का इन्जेक्सन नहीं दिया जाता है तो उस स्थिति में एक विशेष प्रकार के तरल पेय से कुल्ला कराया जाता है या गले के पीछे वाले हिस्से में बेहोशी वाला स्प्रे लगाया जाता है। कंप्यूटर के मॉनिटर में वीडियो इमेज भेजने के लिए एन्डोस्कोपी में एक बहुत ही छोटा सा कैमरा लगाया जाता है। हमारे पेट और डूअडीनल में एन्डोस्कोपी के द्वारा पम्प किया जाता है जिससे कि जी.आई. ट्रैक्ट के ऊपरी परत का करीब से निरीक्षण किया जा सके।
1. ऊपरी जी आई श्रृंखला
ऊपरी जी.आई. श्रृंखला इसके तहत हम उपरी जी.आई. ट्रैक्ट की संरचना को जानने का प्रयास करते हैं।
अपर जी.आई सिरीज
अपर जी.आई सिरीज से हमें ऊपरी जी.आई ट्रैक्ट के आकार का पता चलता है। इस टेस्ट को अस्पताल में किया जाता है। रेडियोलोजिस्ट एक्स-रे के फ़ोटो को देख कर इसका पता लगता है। इस टेस्ट में रोगी को बेहोश नहीं किया जाता है। डॉक्टर, रोगी को टेस्ट के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए और साथ में किन-किन सावधानियों का ध्यान रखाना चाहिए सबकुछ बताते हैं।
इस प्रक्रिया के दौरान, आप एक एक्स-रे मशीन के सामने खड़े होंते हैं या बैठते हैं साथ ही बेरियम जो कि एक तरल पदार्थ है, मरीज के भोजन नलिका, पेट और छोटी आंत में एक आवरण बनाने का काम करता है, जिसकी वजह से डॉक्टर रोगी के अंगों के आकार को एक्स-रे के माध्यम से ज़्यादा स्पष्ट रूप से देख पाते हैं।
परीक्षण के बाद थोड़े समय के लिए रोगी को सूजन और घबराहट हो सकती है। इस प्रक्रिया के कई दिनों बाद तक बेरियम के कारण आपका मल सफ़ेद या हल्के रंग का हो सकता है। एक अच्छे डॉक्टर से हमेशा रोगी को परीक्षण के बाद खाने, पीने के बारे में सलाह लेनी चाहिए।
2. कम्प्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी सीटी स्कैन
सीटी स्कैन में एक्स-रे और कंप्यूटर तकनीक का इस्तेमाल करके चित्र बनाता है। सीटी स्कैन के लिए, डॉक्टर रोगी को पीने के लिए एक घोल या एक विशेष प्रकार के द्रव्य वाला इंजेक्शन देते हैं। इस प्रक्रिया के लिए रोगी एक टेबल पर लेटता है जो कि एक सुरंग के आकर के यन्त्र में फिसलता है और एक्स-रे करता है। एक्स-रे अस्पताल में किया जाता है और रेडियोलॉजिस्ट एक्स-रे में बने चित्र की व्याख्या करता है। इस प्रक्रिया के लिए रोगी को बेहोश करने की ज़रूरत नहीं पड़ती है।
पेप्टिक अल्सर, जो कि रोगी के पेट और छोटी आंत की दीवार में छेद बना देते हैं। सीटी स्कैन के द्वारा इसके निदान करने में मदद मिलती है।
पेप्टिक अल्सर तीन प्रकार के होते हैं:
१. गैस्ट्रिक अल्सर
२. एसोफैगल अल्सर
३. ड्यूडिनल अल्सर
2.वैकल्पिक अल्सर:
ये खुले घाव होते हैं जो टखने, पैर, पैर की उंगलियों और एड़ी के बाहरी तरफ विकसित होते हैं। वे ऊतक को रक्त प्रवाह की कमी के कारण रक्त वाहिकाओं को नुकसान से विकसित करते हैं। धमनी के अल्सर लाल, पीले या काले रंग की त्वचा और पैर में दर्द के साथ दिखाई देते हैं।
3.वीनस अल्सर:
यह पैर के अल्सर का सबसे आम प्रकार है और अक्सर पैर पर, घुटने के नीचे, और टखने के अंदरूनी क्षेत्र पर बनता है। वे क्षतिग्रस्त नसों के कारण बनते हैं जो हृदय में रक्त के अपर्याप्त प्रवाह के कारण होता है। व्यक्ति को सूजन, खुजली वाली त्वचा, खुजली और डिस्चार्ज भी हो सकता है।
4.मुंह का अल्सर:
ये छोटे घाव होते हैं जो मुंह में या मसूड़ों के आधार पर विकसित होते हैं। वे नासूर घावों के नाम से भी जाने जाते हैं। मुंह के छाले गाल के अंदर कटना, कठोर दांत ब्रश करने से, खाद्य एलर्जी, हार्मोनल परिवर्तन, विटामिन की कमी, जीवाणु संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों के कारण उत्पन्न होते हैं।
5.जेनिटल अल्सर:
ये योनि, लिंग, गुदा या आसपास के क्षेत्रों सहित जननांगों पर विकसित होते हैं। जननांग के अल्सर आमतौर पर आघात, सूजन संबंधी बीमारियों, यौन संचारित संक्रमण या स्किनकेयर उत्पादों के लिए एलर्जी प्रतिक्रियाओं के कारण होते हैं। वे दाने और बुखार में दर्द, खुजली, सूजन ग्रंथियों के साथ होता हैं।
अल्सर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
अल्सर के शुरुआती लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं। सामान्य तौर पर, उल्लेखनीय लक्षण इस प्रकार हैं:
- पेट में जलन और दर्द होना। यह मुख्य रूप से पेट के एसिड के कारण होता है जो पेट में स्थिति को बदतर बनाता है। कुछ खाद्य पदार्थ और एसिड कम करने वाली दवाएं खाने से दर्द को कम किया जा सकता है।
- वसायुक्त खाद्य पदार्थों के प्रति इनटॉलेरेंस
- हृदय में जलन होना
- परिपूर्णता या सूजन की भावना
- उल्टी या मतली, कुछ मामलों में, उल्टी लाल या काले रंग में दिखाई दे सकती है
- गहरा खून के साथ मल
- भूख में बदलाव का अनुभव
- अस्पष्टीकृत वजन घटना
- अधिकांश अल्सर के मामलों में पेट में रक्तस्त्राव होता है। हालांकि कभी-कभी केवल रक्तस्त्राव ही अल्सर का लक्षण होता है।रक्तस्त्राव कभी तेज तो कभी धीमी गति से होता है। हालांकि तेज़ रक्तस्त्राव का पता इन वजहों से पता चलता है।
- उल्टी के साथ ख़ून का बहार आना या कॉफ़ी कि तरह का काला पदार्थ बाहर आना। अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है इसका मतलब है कि बिल्कुल भी लापारवाही न करें और बिना देर किए अस्पताल के एमर्जेंसी वॉर्ड में जाएं।
- मल के साथ काले रंग का ख़ून, चिपचिपा दिखने वाला मल आना।
अल्सर के कारण क्या होते हैं:
अल्सर के कारण इस प्रकार हैं:
पेट की अल्सर एक गतिहीन जीवन शैली या खराब खाने की आदत वाले लोगों में विकसित होने की अधिक संभावना है।
ऑसोफैगियल अल्सर अक्सर कुछ एंटीबायोटिक दवाओं या एंटी-इंफ्लेमेटरी और शराब के दुरुपयोग जैसी दवाओं के संपर्क में आने के परिणामस्वरूप होता है।
अत्यधिक अम्लीय स्राव, वसायुक्त और तैलीय भोजन, शराब, कैफीन और तम्बाकू के सेवन के परिणामस्वरूप भी अल्सर बनते हैं। ये सभी कारक पेट के एसिड के निर्माण में योगदान करते हैं जो पेट, अन्नप्रणाली और ग्रहणी के सुरक्षात्मक अस्तर का क्षय करते हैं।
हालिया सिद्धांत के अनुसार, जीवाणु संक्रमण भी पेप्टिक अल्सर के कारणों में से एक होता है। उदाहरण के लिए, एच पाइलोरी पेट के अल्सर के 80% और ग्रहणी संबंधी अल्सर के 90% में मौजूद होते है।
ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक जैसे कि इबुप्रोफेन, एस्पिरिन या नेप्रोक्सन, शराब का सेवन, मनोवैज्ञानिक तनाव और धूम्रपान का अति प्रयोग अल्सर के गठन को तेज करता है, विशेष रूप से एच पाइलोरी वाले लोगों में होता है।
पेट के अल्सर बुजुर्ग लोगों में होने की अधिक संभावना होती है। बढ़ती उम्र के साथ, पाइलोरस आराम करता है और अतिरिक्त पित्त को पेट में रिसने देता है जो पेट की परत को नष्ट कर देता है।
टाइप ए ब्लड ग्रुप वाले लोगों को पेट के अल्सर होने का खतरा अधिक होता है।
डुओडिनल अल्सर उन लोगों में विकसित होता है जिनके पास ओ ब्लड ग्रूप प्रकार होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस रक्त समूह के लोग रक्त कोशिकाओं की सतह पर कुछ पदार्थों का उत्पादन करने में असमर्थ होती हैं जो ग्रहणी के अस्तर की रक्षा करते हैं।
अल्सर का निदान कैसे करें?
यूरिया सांस परीक्षण(यूरिया ब्रेथ टेस्ट):
रोगी को यूरिया सांस परीक्षण का उपयोग करके निदान किया जाता है जहां एक विशिष्ट पेय रोगी को दिया जाता है जो एच.पाइलोरी बैक्टीरिया द्वारा टूट जाता है और सांस का विश्लेषण किया जाता है यह देखने के लिए कि क्या उसे एच. पाइलोरी संक्रमण है।
स्टूल एंटीजन टेस्ट / ब्लड टेस्ट:
यह विश्लेषण करने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है कि क्या इसमें एच. पाइलोरी के एंटीबॉडी हैं जो आजकल स्टूल एंटीजन टेस्ट द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
गैस्ट्रोस्कोपी:
यह सीधे पेट के अंदर देखने और यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि इसमें अल्सर है या नहीं। इस प्रक्रिया में एंडोस्कोप को एक कैमरे के साथ एक छोर पर मुंह और ग्रहणी में पारित करना शामिल होता है। प्रक्रिया से पहले एक हल्के सिडेटिव दिया जा सकता है और प्रक्रिया को और अधिक आरामदायक बनाने के लिए गले पर एक ऐनेस्थेटिक स्प्रे किया जा सकता है।
कैमरे द्वारा कैप्चर की गई छवियां आमतौर पर अल्सर की पुष्टि करती हैं। हालांकि, कभी-कभी छोटे ऊतक के नमूने को भी उसी के लिए ले जाने और परीक्षण करने की आवश्यकता हो सकती है। यह आमतौर पर आउट पेशेंट प्रक्रिया है और रोगी को आमतौर पर उसी दिन घर भेजा जाता है।
एंडोस्कोपी:
अल्सर के निदान के लिए एंडोस्कोपी एक और प्रक्रिया है। पीपीआई और एच 2 रिसेप्टर एंटागोनिस्ट का उपयोग एसिड के स्तर को कम करने के लिए किया जाता है जब तक कि सूजन नीचे नहीं जाती है। यदि एक निशान ऊतक के कारण होता है, तो उसे एंडोस्कोपिक गुब्बारा मुद्रास्फीति की आवश्यकता हो सकती है।
अल्सर का इलाज कैसे करें?
अल्सर आमतौर पर एंटासिड और एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज करना आसान होता है। कई अन्य दवाएं भी हैं जो पेट द्वारा उत्पादित एसिड की मात्रा को कम करती हैं। अल्सर से पीड़ित व्यक्ति को चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाता है तो अल्सर एनीमिया और पेट कार्सिनोमा जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है।
अधिकांश अल्सर का उपचार विभिन्न दवाओं का उपयोग करके किया जाता है और कुछ मामलों में, सर्जिकल प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। एंटीबायोटिक्स का उपयोग एच पाइलोरी को मिटाने के लिए किया जा सकता है जबकि एंटी-अल्सर दवाओं का उपयोग एसिड स्राव को रोकने और अल्सर को ठीक करने के लिए किया जाता है।
रक्तस्राव या छिद्रित अल्सर के मामलों में, एसोफैगोगैस्ट्रोड्योडेनोस्कोपी किया जा सकता है और सर्जरी की सिफारिश की जाती है। आपका चिकित्सक धूम्रपान छोड़ने, शराब के सेवन को सीमित करने और अल्सर के विकास को रोकने के लिए एनएसएआईडी के अति प्रयोग से बचने की सलाह दे सकता है
अल्सर की जटिलताएं क्या होती हैं?
इनकी जटिलताओं काफी दुर्लभ होती हैं, लेकिन बहुत गंभीर हो सकती हैं। पेट के अल्सर की जटिलताओं में से कुछ इस प्रकार हैं:
आंतरिक रक्तस्राव(इन्टर्नल ब्लीडिंग):
यह सबसे आम समस्या है जो तब होती है जब अल्सर रक्त वाहिका के स्थल पर बनता है। रक्तस्राव या तो धीमी गति से और लंबे समय तक एनीमिया के लिए अग्रणी हो सकता है या तीव्र और गंभीर हो सकता है जिससे व्यक्ति उल्टी या मल में रक्त पास कर सकता है। एंडोस्कोपी का उपयोग आमतौर पर रक्तस्राव के कारण को खोजने के लिए किया जाता है।
छिद्र:
यह एक दुर्लभ जटिलता है, लेकिन अगर यह गंभीर है तो काफी गंभीर हो सकती है। छिद्र आपके पेट के बैक्टीरिया को पेरिटोनिटिस पैदा करने वाले आपके पेट की परत से बचने और संक्रमित करने में सक्षम बनाता है। यहां से, संक्रमण तेजी से रक्त में फैलता है जिससे कहीं और फैलने से पहले सेप्सिस होता है। यह कई अंग फेलियोर के जोखिम के साथ आता है और अगर अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो यह घातक हो सकता है।
गैस्ट्रिक आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन:
इस स्थिति में, सूजन पेट का अल्सर पाचन तंत्र के माध्यम से भोजन के सामान्य मार्ग को बाधित करता है। लक्षण हैं:
अपचित भोजन कणों के साथ बार-बार उल्टी होना
सूजन या परिपूर्णता की लगातार भावना
छोटे भोजन के बाद भी परिपूर्णता का आसान एहसास
अस्पष्टीकृत वजन घटना
अल्सर के दीर्घकालिक प्रभाव क्या होते हैं?
अल्सर, जब लंबे समय तक अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो निम्न स्थितियों को जन्म दे सकता है:
रक्तस्राव:
मरीजों को आंतरिक रक्तस्राव और रक्त की हानि का अनुभव हो सकता है, जिससे उल्टी या मल में एनीमिया और रक्त हो सकता है। इसके लिए अस्पताल में भर्ती या आधान की आवश्यकता हो सकती है।
संक्रमण:
छुआछूत होने पर अल्सर पेट या छोटी आंत की दीवारों के माध्यम से छिद्रित हो सकता है और पेट की गुहा क्षेत्र में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है।
यह पाचन तंत्र के माध्यम से भोजन के मार्ग के रुकावट को जन्म दे सकता है और इस तरह उल्टी, मतली, वजन घटाने, आंत में सूजन आदि के लक्षण हो सकता है।
अल्सर के लिए घरेलू उपचार क्या हैं?
अल्सर के लिए घरेलू उपचार इस प्रकार निम्नलिखित हैं:
फ्लेवोनोइड्स:
इनमें समृद्ध खाद्य पदार्थ हैं:
- सोयाबीन
- फलियां
- लाल अंगूर
- गोभी
- ब्रोकोली
- सेब
- जामुन
- चाय विशेषकर ग्रीन टी
- ये गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव हैं और एच. पाइलोरी से लड़ने में मदद करते हैं।
प्रोबायोटिक्स:
इन युक्त खाद्य पदार्थ हैं:
- छाछ
- मीसो
- किमची
- दही
- केफिर
- ये एच पाइलोरी को पोंछने में सहायक होते हैं और साथ ही रिकवरी में आसानी करते हैं।
शहद:
यह एक शक्तिशाली जीवाणुरोधी और एंटीऑक्सिडेंट है और एच. पाइलोरी के खिलाफ लड़ता है।
लहसुन: लहसुन का अर्क एच. पाइलोरी के विकास को रोक सकता है जैसा कि प्रयोगशाला, जानवरों और मानव पर परीक्षण किया गया है।
क्रैनबेरी
- फल, सब्जियां और साबुत अनाज:
- पॉलीफेनॉल्स को अल्सर से बचाने के लिए जाना जाता है और खाद्य पदार्थों में सूखे मेंहदी, मैक्सिकन अजवायन, डार्क चॉकलेट और फ्लैक्ससीड होते हैं।
- एसिड रिफ्लक्स दर्द को कम करने के लिए:
- आपको लीमिट भी होनी चाहिए:
- कैफीन और अन्य कैफीनयुक्त पेय
- कार्बोनेटेड बेवरिज
- चॉकलेट
- मिर्च और काली मिर्च
- प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ
- नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थ
- डीप फ्राई खाद्य पदार्थ
- खट्टे और टमाटर जैसे अम्लीय खाद्य पदार्थ
- सीमित मात्रा में शराब
- अधिक खाने से बचें
- सोने के तीन से चार घंटे तक खाने से बचें
अल्सर के बारे में विशेषज्ञ क्या कहते हैं:
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड ग्रुप A वाले लोगों को पेट के अल्सर होने का खतरा होता है, जो कई बार कैंसर का कारण भी बन सकता है। यह भी देखा गया
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