डिप्रेशन
क्या है डिप्रेशन
डिप्रेशन एक सीरियस समस्या है जिसका इलाज मुमकिन है
डिप्रेशन का इलाज बिना दवाई के एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा भी किया जा सकता है
एक्यूप्रेशर चिकित्सा से इलाज के बारे में जाने के लिए अंत तक जरूर पढ़ें बहुत ही कारगर सिद्ध हो रहा है एक्यूप्रेशर चिकित्सा
पहले जानते है डिप्रेशन या अवसाद के बारे में :
डिप्रेशन के लक्षण
कारण
इलाज
दवा
उपचार
परहेज
बिना दवाई के एक्यूप्रेशर से डिप्रेशन का इलाज
डिप्रेशन या अवसाद की समस्या के बारे में ज्यादातर लोग बात नहीं करते हैं। इसपर बात नहीं होना ही इसके समाधान में सबसे बड़ी बाधा है।डिप्रेशन एक सीरियस समस्या है लेकिन इसका इलाज है। युवा से लेकर बुजुर्ग तक कोई भी इसका शिकार हो सकता है। यह धीरे-धीरे खतरनाक हो जाता है और इसके शिकार लोगों के साथ उनके आस-पास के लोगों को भी प्रभावित करता है।
डिप्रेशन सिर्फ बीमारी नहीं है और न ही दिमागी फितूर। यह एक ऐसी मानसिक हालत है, जिसमें पॉजिटिव सोचने और बेहतर रिजल्ट तक पहुंचने की इंसान की कपैसिटी कम हो जाती है। वक्त पर इलाज और करीबियों का साथ इस बीमारी से निपटने में अहम भूमिका निभाता है।
अवसाद या डिप्रेशन के विभिन्न रूप
प्रमुख अवसाद-
प्रमुख अवसाद के मामले में लक्षण किसी व्यक्ति की नींद, काम, अध्ययन, खाने और अपने जीवन का आनंद लेने की क्षमता में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त गंभीर हैं। प्रमुख अवसाद एपिसोड एक व्यक्ति के जीवन में एक बार या अधिक सामान्य रूप से कई बार हो सकता है।
डाइस्टिमिया या डाइस्टीमिक डिसऑर्डर-
अवसाद के इस प्रकार में लक्षण कम गंभीर होते हैं लेकिन लंबे समय तक बने रहते हैं जो दो साल या उससे अधिक तक फैले होते हैं।
मामूली अवसाद-
मामूली अवसाद के मामले में लक्षण सभी गंभीर नहीं होते हैं और केवल थोड़ी सी मात्रा के लिए बने रहते हैं।
हम सब ज़िंदग़ी में कभी न कभी थोड़े समय के लिए नाख़ुश होते हैं मगर डिप्रेशन यानी अवसाद उससे कहीं ज़्यादा गहरा, लंबा और ज़्यादा दुखद होता है.
इसकी वजह से लोगों की ज़िंदगी से रुचि ख़त्म होने लगती है और रोज़मर्रा के कामकाज से मन उचट जाता है.
क्यों
अभी तक ये स्पष्ट रूप से नहीं बताया जा सका है कि अवसाद किस वजह से होता है, मगर माना जाता है कि इसमें कई चीज़ों की अहम भूमिका होती है.
ज़िंदग़ी के कई अहम पड़ाव जैसे-
किसी नज़दीक़ी की मौत, नौकरी चले जाना या शादी का टूट जाना, आम तौर पर अवसाद की वजह बनते हैं.
इनके साथ ही अगर आपके मन में हर समय कुछ बुरा होने की आशंका रहती है तो इससे भी अवसाद में जाने का ख़तरा रहता है. इसके तहत लोग सोचते रहते हैं 'मैं तो हर चीज़ में विफल हूँ'.
कुछ मेडिकल कारणों से भी लोगों को अवसाद होता है, जिनमें एक है थायरॉयड की कम सक्रियता होना. कुछ दवाओं के साइड इफ़ेक्ट्स में भी अवसाद हो सकता है. इनमें ब्लड प्रेशर कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएँ शामिल हैं.
इतना ही नहीं अवसाद बिना किसी एक ख़ास कारण के भी हो सकता है. ये धीरे-धीरे घर कर लेता है और बजाए मदद की कोशिश के आप उसी से संघर्ष करते रहते हैं.
दिमाग़ के रसायन अवसाद की हालत में किस तरह की भूमिका अदा करते हैं अभी तक ये भी पूरी तरह नहीं समझा जा सका है. मगर ज़्यादातर विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि ये सिर्फ़ दिमाग़ में किसी तरह के असंतुलन की वजह से ही नहीं होता.
अवसाद किसे हो सकता है?
इसका एक छोटा जवाब है- ये किसी को भी हो सकता है.
वैसे शोध से पता चलता है कि इसके पीछे कोई आनुवांशिक वजह भी हो सकती है. इसके तहत कुछ लोग जब चुनौतीपूर्ण समय से गुज़र रहे होते हैं तो उनके अवसाद में जाने की आशंका अधिक रहती है.
जिन लोगों के परिवार में अवसाद का इतिहास रहा हो वहाँ लोगों के डिप्रेस्ड होने की आशंका भी ज़्यादा होती है. इसके अलावा गुणसूत्र 3 में होने वाले कुछ आनुवांशिकीय बदलावों से भी अवसाद हो सकता है. इससे लगभग चार प्रतिशत लोग प्रभावित होते हैं.
डिप्रेशन के लक्षण -
दैनिक गतिविधियों में रुचि खोना
अनिद्रा या ज्यादा सोना
गुस्सा
चिड़चिड़ापन
ऊर्जा का नुकसान
आत्म घृणित
एकाग्रता मुद्दों
ये भी हैं लक्षण
मानसिक : दो सप्ताह से ज्यादा लगातार उदासी, असंगत महसूस करना, मिजाज में उतार-चढ़ाव, भूलना, एकाग्र न हो पाना, गतिविधियों में रुचि न लेना, चिंता, घबराहट, अकेलापन, शारीरिक देखभाल में अरुचि, नशे की इच्छा होना आदि
विचार व अनुभूति :
असफलता संबंधी विचार, स्वयं को कोसना, शीघ्र निराश होना, असहयोग, निकम्मेपन के विचार, दुर्भाग्यपूर्ण कार्य के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहराना, भविष्य के लिए नकारात्मक व निराशावादी दृष्टिकोण, आत्महत्या के विचार आदि।
शारीरिक :
सामान्य नींद की प्रक्रिया में विघ्न, नींद न आना व सुबह जल्दी उठ जाना, किसी काम को धीरे-धीरे करना, भूख में कमी, लगातार वजन कम होना, थकान महसूस होना, अपच, मुंह सूखना, कब्ज, अतिसार, मासिक धर्म की अनियमितता, सिर, पेट, सीने, पैरों, जोड़ों में दर्द, भारीपन, पैरों में पसीना, सांस लेने में दिक्कत आदि।
कई तरह के अवसाद
इसके दो मुख्य प्रकार हैं पहला एंडोजीनस (यह आंतरिक कारणों से होता है)। दूसरा न्यूरोटिक (आमतौर पर यह बाहरी कारणों से होता है)। इनके अलावा डिसथीमिया, मौसम प्रभावित डिप्रेशन (सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर), मनोविक्षप्ति (साइकोटिक), छिपा (मास्कड) व प्रसन्नमुख (स्माइलिंग) डिप्रेशन इसके अन्य प्रकार हैं।
डिप्रेशन या अवसाद के कारण -
जेनेटिक प्रोपेसिटी-
जिन लोगों के परिवारों में अवसाद के पिछले इतिहास हैं, वे बीमारी होने के लिए अधिक संवेदनशील हैं, जिन्हें अवसाद का परिवारिक इतिहास हैं।परिवार में माता-पिता या कोई अन्य सदस्य डिप्रेशन (अवसाद) से पीडि़त होता है तो बच्चों में ऐसा होने का खतरा रहता है।
कमजोर व्यक्ति -
बचपन में मां-बाप के प्यार का अभाव, कठोर अनुशासन, तिरस्कार, सामथ्र्य से अधिक अपेक्षा या ईष्र्या कई बार मस्तिष्क को ठेस पहुंचाती हैं। जो बड़े होने पर विपरीत परिस्थितियों में व्यक्ति के लिए डिप्रेशन का कारण हो सकती है।
मानसिक रसायन -
अवसाद से पीड़ित लोगों की रसायन शास्त्र उन लोगों से अलग है जिनके पास रोग नहीं है।बार-बार असफलता, नुकसान या किसी प्रियजन की मृत्यु आदि से भी ऐसा हो सकता है।
शारीरिक रोग:
कैंसर, नि:शक्तता या कोई अन्य मर्ज जिसमें रोगी लंबे समय तक बिस्तर पर रहता है। वह इस परेशानी से ग्रसित हो सकता है।
तनाव :
कभी कभी ऐसी घटनाएं जो एक प्रिय व्यक्ति की मौत की तरह मजबूत भावनाओं को जन्म देती हैं, एक कठिन रिश्ते या अन्य स्थितियों जो तीव्र रूप से तनावपूर्ण होती हैं, अवसाद के झटके को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त हो सकती हैं।
अन्य कारण :
परिवार झगड़े, अशांति, संबंध-विच्छेद, व आर्थिक परेशानी आदि वजहों से भी ऐसा हो सकता है।
इलाज
अवसाद के साथ एक रोगी के इलाज में पहला कदम एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर या डॉक्टर से परामर्श करना है। इस यात्रा के बाद अन्य समान स्थितियों को रद्द करने के लिए परीक्षाएं और प्रयोगशाला परीक्षणों का पालन किया जा सकता है। एक मरीज़ द्वारा ली गई दवाएं भी जांच के अधीन आती हैं।
चिकित्सक रोग के विस्तृत परिवार और चिकित्सा इतिहास को ध्यान में रखता है और फिर तदनुसार एंटीड्रिप्रेसेंट्स को निर्धारित करने के लिए आगे बढ़ता है। हालांकि, दवाएं प्रभावी होने में धीमी हैं। लेकिन चिकित्सा एंटीड्रिप्रेसेंट्स के पास अक्सर गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं, जो सभी मामलों में स्वीकार्य नहीं हो सकते हैं। मनोचिकित्सा एक और विकल्प है जो अवसाद के इलाज में मदद कर सकता है। यह नए व्यवहार और सोच के तरीकों को पढ़कर काम करता है जो कुछ लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। यह व्यक्ति को अंतर्दृष्टि देता है कि अवसाद क्यों हो रहा है और स्थिति को और भी खराब कर देता है।
उपाय
जानिए डिप्रेशन से बचने में कौन से उपाय हैं बेहद कारगर -
1 परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताएं -
अत्यधिक तनाव के समय किसी से मिलने जुलने या बातें करने का बिल्कुल मन नहीं करता। लेकिन यकीन मानिए यह तरीका आपको डिप्रेशन में जाने से बचा सकता है। जब भी आपको लगे कि आप मानसिक तनाव या डिप्रेशन के शिकार हैं, अपने परिवार के लोगों या खास दोस्तों के साथ समय बिताएं और बातें करें।
2 सामाजिक सक्रियता -
सामाजिक रूप से सक्रिय रहना आपको व्यस्त भी बनाए रखेगा और तनाव के कारण की ओर से आपका ध्यान भी बंटेगा। इससे आप नकारात्मकता के शिकार न होकर अपनी ऊर्जा का सही उपयोग कर पाएंगे। कुछ समय में आप सकारात्मकता का अनुभव करेंगें।
3 नकारात्मकता से दूर रहें -
खुद को सकारात्मक बनाएं और प्रोत्साहित करें। अपनी खूबियों और अब तक की उपलब्धियों की लिस्ट बनाएं या फिर कुछ अच्छा और उपयोग कार्य करने के लिए योजना बनाएं। खुद से प्रेम करें और हर चीज को सकारात्मक नजरिए से देखें।
4 भरपूर नींद लें -
तनावग्रस्त होने पर अपनी नींद का पूरा ध्यान रखें। कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लें। नींद पूरी होगी तो दिमाग को आराम मिलेगा और वह बगैर तनाव के बेहतर तरीके से कार्य करेगा। छोटे-मोटे तनाव के लिए नींद एक बेहतरीन इलाज है।
5 धूप लें -
सुबह के समय या फिर जब भी आप सहज हों हल्की धूप जरूर लें। इससे आपका मन और मस्तिष्क को आराम मिलता है और तनाव भी दूर होता है। प्राकृतिक स्थानों पर जाएं या फिर घर के आंगन, बरामदे या बालकनी में शांत मन से बैठें।
दवा
अगर आपके डॉक्टर ने डिप्रेशन से उबरने के लिए आपको कुछ दवाओं की सलाह दी है, तो बताये गए समय पर और सही मात्रा में डोज लें। आपके डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं को लेना बंद न करें।
आप अगर प्रेगनेंट होना चाह रहे हैं या फिर प्रेगनेंट हैं, तो फिर इस स्थिति में आपके डॉक्टर से अपनी दवाओं के बारें में बात करना बेहद जरूरी है। कुछ एंटीडिप्रेसेंट आपके अजन्मे बच्चे की सेहत पर बड़े स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन सकतें है। आपको अपने डॉक्टर से बात करके अपने और बच्चे के लिए सबसे अच्छी दवाओं और बेहतरीन इलाज की तलाश करनी होगी।
कई बार डिप्रेशन दवाओं से ठीक नहीं होता है। अगर आपके लक्षणों में सुधार नहीं दिखता है तो आपका डॉक्टर आपको दूसरे ट्रीटमेंट को अपनाने की सलाह दे सकता है।
परहेज
अल्कोहल और ड्रग्स के सेवन से बचें
शराब पीना या ड्रग्स लेने से आप थोड़ी देर के लिए बेहतर महसूस कर सकते हैं। लेकिन लंबे वक्त में शरीर पर इनका निगेटिव प्रभाव ही पड़ता है। ये चीजें मिलकर आपके डिप्रेशन और एंग्जाइटी के लक्षणों को और खराब कर सकती हैं।
न कहना भी सीखें :-
अगर आप खुद को बेचैन महसूस करेंगे तो, ये एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षणों को और ज्यादा खराब कर सकता है। अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच सीमाएं तय कीजिए। इससे आप कुछ ही दिन में बेहतर महसूस करना शुरू कर देंगे।
अपना ख्याल रखें :-
आप खुद का ख्याल रखकर भी डिप्रेशन के लक्षणों से राहत पा सकते हैं। इसमें
ढेर सारी नींद
हेल्दी डाइट लेना
निगेटिव लोगों से दूर रहना
आनंद देने वाले कामों में हिस्सा लेना
शामिल है।
डिप्रेशन का एक्यूप्रेशर चिकित्सा से इलाज
मॉडर्न मेडिसिन के अलावा एक्युपंक्चर और एक्युप्रेशर भी इलाज का बेहतरीन तरीका हो सकते हैं। इनमें बेशक इलाज में ज्यादा वक्त लगता है, लेकिन कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। हमारे देश में ये सिस्टम बहुत चलन में नहीं हैं लेकिन चीन में ज्यादातर इन्हीं के जरिए इलाज किया जाता है। हालांकि अब ये तरीके अपने यहां भी इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं।
एक्युपंक्चर/एक्युप्रेशर का मतलबएक्यु चीनी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है पॉइंट, यानी अगर शरीर के कुछ खास पॉइंट्स पर सूई से पंक्चर (छेद) कर इलाज किया जाए तो एक्युपंक्चर कहलाता है और अगर उन्हीं पॉइंट्स पर हाथ से या किसी इक्युपमेंट से दबाव डाला जाए तो एक्युप्रेशर कहलाता है। अगर पैरों और हाथों के पॉइंट्स को दबाते हैं तो रिफ्लेक्सॉलजी कहलाता है, जबकि मसाज के जरिए पूरे शरीर के पॉइंट्स दबाने को शियात्सु कहते हैं। अगर एनर्जी कम है तो क्लॉकवाइज और ज्यादा है तो एंटी-क्लॉकवाइज दबाया जाता है। इसके अलावा, प्रेस और रिलीज तकनीक भी अपना सकते हैं यानी कुछ देर के लिए पॉइंट को दबाएं, फिर छोड़ दें। ऐसा बार-बार करें।
भागदौड़ भरे जीवन में तनाव होना अब आम बात है। ये तनाव यंग जनरेशन से लेकर बड़े-बुजुर्गों में भी देखने को मिल रहा है। अगर आप भी तनाव की समस्या से परेशान है तो फिटनेस एक्सपर्ट नेहा केडारे आपको शरीर के कुछ ऐसे प्रेशर पॉइंट के बारे में बताएंगी जो आपको तनाव से मुक्ति दिलाएंगे। नेहा बताती है कि एक्यूप्रेशर करने से एंडोर्फिन नामक रसायन शरीर में बनने लगता है जिससे सर्कुलेशन अच्छा होता है। यह मांसपेशियों के तनाव के साथ दिमाग के तनाव को भी शांत करता है।
वैसे तो डिप्रेशन से छुटकारा पाने के लिए पूरी बॉडी के प्वाइंट्स को दबाना चाहिए हाथो और पैरों के सभी प्वाइंट्स पर दिन में कम से कम तीन बार दबाव देना चाहिए डिप्रेशन के लिए कुछ विशेष प्वाइंट्स इस प्रकार से है :
डिप्रेशन से चाहिए छुटकारा तो जरूर दबाएं शरीर के ये 5 प्रेशर पॉइंट
सिर का प्रेशर पॉइंट
आंखों के बीच वाले बिन्दुओं पर दबाव डालने से बॉडी में मेलाटोनिन हार्मोन स्रावित होता है, जिससे अच्छी नींद आती है। इसके साथ ही तनाव पैदा करने वाला हार्मोन कार्टिसोल का स्त्राव भी नहीं होता। सिर के प्रेशर बिन्दुओं पर यदि नियमित रूप से तीन सेकण्ड तक दबाव डाला जाए तो तेज सिरदर्द से भी आराम मिलता है।
कान के पीछे
कान की नीचे वाले हिस्से यानी इयर लोब की रोजाना पांच मिनट मालिश करने से तनाव से आराम मिलता है। इसके साथ ही याद्दाश्त भी बढ़ती है। कान के पीछे के झुकाव वाले पॉइंट को दबाने से डिपे्रशन, सिरदर्द, चक्कर और आंख, कान और नाक से जुड़ी बीमारियों में राहत मिलती है।
गर्दन
गर्दन के प्रेशर पॉइंट को दबाकर भी टेंशन को दूर किया जा सकता है। गर्दन में रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर की मांसपेशियों में दबाव डालें लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि रीढ़ की हड्डी पर दबाव नहीं पड़े। मांसपेशियों पर ही ऊपर-नीचे की तरफ प्रेशर बनाने पर तनाव से राहत मिलती है।
हाथों के प्रेशर पॉइंट
हाथों की कलाई पर भी ऐसे प्रेशर पॉइंट होते हैं, जिन पर दबाव बनाने से तनाव से आराम मिलता है। दरअसल अंगुली और अंगूठे के बीच बहुत-सी मसल्स होती हैं। हाथ के दोनों तरफ प्रेशर बिंदुओं पर दबाव बनाएं। हाथ को बंद करें और खोले। इससे दबाव बिंदुओं पर दबाव पड़ेगा और तनाव से आराम मिलेगा।
पैरों पर
पैरों के प्रेशर पॉइंट को दबाने से पीठ दर्द, थकान, सिरदर्द, चिंता, तनाव और अकेलेपन में आश्चर्यजनक आराम मिलता है। पांव के तलवों पर स्थित प्रतिबिम्ब केंद्र पर दबाव देकर रक्त संचार को सुचारू किया जा सकता है। पैरों के तलवों पर दबाव बनाने से बॉडी के सभी हिस्सों को सुचारू किया जा सकता है।
तनाव दूर करने के लिए
तनाव दूर करने के लिए- हमारी आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव हमें बहुत परेशान करता है। कई बार शारीरिक क्षमता होने के बावजूद मानसिक तनाव के कारण हम कार्य को ठीक तरह से नहीं कर पाते है। ऐसे में आप अंगूठे के इस भाग को 5 मिनट तक दबाए। ये आपकी पिट्यूटरी ग्लैंड को एक्टिव करता है।
सी ऑफ ट्रेंक्वालिटी-
ये प्वाइंट चेस्ट की बीचो बीच मौजूद होता है। इस प्वाइंट पर दबाने से डिप्रेशन, नर्वसनेस और एंग्जाइटी दूर होती है।
ये प्वाइंट छाती के बीचों बीच रहता है।एंग्जाइटी
डिप्रेशन एक सीरियस समस्या है जिसका इलाज मुमकिन है
डिप्रेशन का इलाज बिना दवाई के एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा भी किया जा सकता है
एक्यूप्रेशर चिकित्सा से इलाज के बारे में जाने के लिए अंत तक जरूर पढ़ें बहुत ही कारगर सिद्ध हो रहा है एक्यूप्रेशर चिकित्सा
पहले जानते है डिप्रेशन या अवसाद के बारे में :
डिप्रेशन के लक्षण
कारण
इलाज
दवा
उपचार
परहेज
बिना दवाई के एक्यूप्रेशर से डिप्रेशन का इलाज
डिप्रेशन या अवसाद की समस्या के बारे में ज्यादातर लोग बात नहीं करते हैं। इसपर बात नहीं होना ही इसके समाधान में सबसे बड़ी बाधा है।डिप्रेशन एक सीरियस समस्या है लेकिन इसका इलाज है। युवा से लेकर बुजुर्ग तक कोई भी इसका शिकार हो सकता है। यह धीरे-धीरे खतरनाक हो जाता है और इसके शिकार लोगों के साथ उनके आस-पास के लोगों को भी प्रभावित करता है।
डिप्रेशन सिर्फ बीमारी नहीं है और न ही दिमागी फितूर। यह एक ऐसी मानसिक हालत है, जिसमें पॉजिटिव सोचने और बेहतर रिजल्ट तक पहुंचने की इंसान की कपैसिटी कम हो जाती है। वक्त पर इलाज और करीबियों का साथ इस बीमारी से निपटने में अहम भूमिका निभाता है।
अवसाद या डिप्रेशन के विभिन्न रूप
प्रमुख अवसाद-
प्रमुख अवसाद के मामले में लक्षण किसी व्यक्ति की नींद, काम, अध्ययन, खाने और अपने जीवन का आनंद लेने की क्षमता में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त गंभीर हैं। प्रमुख अवसाद एपिसोड एक व्यक्ति के जीवन में एक बार या अधिक सामान्य रूप से कई बार हो सकता है।
डाइस्टिमिया या डाइस्टीमिक डिसऑर्डर-
अवसाद के इस प्रकार में लक्षण कम गंभीर होते हैं लेकिन लंबे समय तक बने रहते हैं जो दो साल या उससे अधिक तक फैले होते हैं।
मामूली अवसाद-
मामूली अवसाद के मामले में लक्षण सभी गंभीर नहीं होते हैं और केवल थोड़ी सी मात्रा के लिए बने रहते हैं।
हम सब ज़िंदग़ी में कभी न कभी थोड़े समय के लिए नाख़ुश होते हैं मगर डिप्रेशन यानी अवसाद उससे कहीं ज़्यादा गहरा, लंबा और ज़्यादा दुखद होता है.
इसकी वजह से लोगों की ज़िंदगी से रुचि ख़त्म होने लगती है और रोज़मर्रा के कामकाज से मन उचट जाता है.
क्यों
अभी तक ये स्पष्ट रूप से नहीं बताया जा सका है कि अवसाद किस वजह से होता है, मगर माना जाता है कि इसमें कई चीज़ों की अहम भूमिका होती है.
ज़िंदग़ी के कई अहम पड़ाव जैसे-
किसी नज़दीक़ी की मौत, नौकरी चले जाना या शादी का टूट जाना, आम तौर पर अवसाद की वजह बनते हैं.
इनके साथ ही अगर आपके मन में हर समय कुछ बुरा होने की आशंका रहती है तो इससे भी अवसाद में जाने का ख़तरा रहता है. इसके तहत लोग सोचते रहते हैं 'मैं तो हर चीज़ में विफल हूँ'.
कुछ मेडिकल कारणों से भी लोगों को अवसाद होता है, जिनमें एक है थायरॉयड की कम सक्रियता होना. कुछ दवाओं के साइड इफ़ेक्ट्स में भी अवसाद हो सकता है. इनमें ब्लड प्रेशर कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएँ शामिल हैं.
इतना ही नहीं अवसाद बिना किसी एक ख़ास कारण के भी हो सकता है. ये धीरे-धीरे घर कर लेता है और बजाए मदद की कोशिश के आप उसी से संघर्ष करते रहते हैं.
दिमाग़ के रसायन अवसाद की हालत में किस तरह की भूमिका अदा करते हैं अभी तक ये भी पूरी तरह नहीं समझा जा सका है. मगर ज़्यादातर विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि ये सिर्फ़ दिमाग़ में किसी तरह के असंतुलन की वजह से ही नहीं होता.
अवसाद किसे हो सकता है?
इसका एक छोटा जवाब है- ये किसी को भी हो सकता है.
वैसे शोध से पता चलता है कि इसके पीछे कोई आनुवांशिक वजह भी हो सकती है. इसके तहत कुछ लोग जब चुनौतीपूर्ण समय से गुज़र रहे होते हैं तो उनके अवसाद में जाने की आशंका अधिक रहती है.
जिन लोगों के परिवार में अवसाद का इतिहास रहा हो वहाँ लोगों के डिप्रेस्ड होने की आशंका भी ज़्यादा होती है. इसके अलावा गुणसूत्र 3 में होने वाले कुछ आनुवांशिकीय बदलावों से भी अवसाद हो सकता है. इससे लगभग चार प्रतिशत लोग प्रभावित होते हैं.
डिप्रेशन के लक्षण -
दैनिक गतिविधियों में रुचि खोना
अनिद्रा या ज्यादा सोना
गुस्सा
चिड़चिड़ापन
ऊर्जा का नुकसान
आत्म घृणित
एकाग्रता मुद्दों
ये भी हैं लक्षण
मानसिक : दो सप्ताह से ज्यादा लगातार उदासी, असंगत महसूस करना, मिजाज में उतार-चढ़ाव, भूलना, एकाग्र न हो पाना, गतिविधियों में रुचि न लेना, चिंता, घबराहट, अकेलापन, शारीरिक देखभाल में अरुचि, नशे की इच्छा होना आदि
विचार व अनुभूति :
असफलता संबंधी विचार, स्वयं को कोसना, शीघ्र निराश होना, असहयोग, निकम्मेपन के विचार, दुर्भाग्यपूर्ण कार्य के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहराना, भविष्य के लिए नकारात्मक व निराशावादी दृष्टिकोण, आत्महत्या के विचार आदि।
शारीरिक :
सामान्य नींद की प्रक्रिया में विघ्न, नींद न आना व सुबह जल्दी उठ जाना, किसी काम को धीरे-धीरे करना, भूख में कमी, लगातार वजन कम होना, थकान महसूस होना, अपच, मुंह सूखना, कब्ज, अतिसार, मासिक धर्म की अनियमितता, सिर, पेट, सीने, पैरों, जोड़ों में दर्द, भारीपन, पैरों में पसीना, सांस लेने में दिक्कत आदि।
कई तरह के अवसाद
इसके दो मुख्य प्रकार हैं पहला एंडोजीनस (यह आंतरिक कारणों से होता है)। दूसरा न्यूरोटिक (आमतौर पर यह बाहरी कारणों से होता है)। इनके अलावा डिसथीमिया, मौसम प्रभावित डिप्रेशन (सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर), मनोविक्षप्ति (साइकोटिक), छिपा (मास्कड) व प्रसन्नमुख (स्माइलिंग) डिप्रेशन इसके अन्य प्रकार हैं।
डिप्रेशन या अवसाद के कारण -
जेनेटिक प्रोपेसिटी-
जिन लोगों के परिवारों में अवसाद के पिछले इतिहास हैं, वे बीमारी होने के लिए अधिक संवेदनशील हैं, जिन्हें अवसाद का परिवारिक इतिहास हैं।परिवार में माता-पिता या कोई अन्य सदस्य डिप्रेशन (अवसाद) से पीडि़त होता है तो बच्चों में ऐसा होने का खतरा रहता है।
कमजोर व्यक्ति -
बचपन में मां-बाप के प्यार का अभाव, कठोर अनुशासन, तिरस्कार, सामथ्र्य से अधिक अपेक्षा या ईष्र्या कई बार मस्तिष्क को ठेस पहुंचाती हैं। जो बड़े होने पर विपरीत परिस्थितियों में व्यक्ति के लिए डिप्रेशन का कारण हो सकती है।
मानसिक रसायन -
अवसाद से पीड़ित लोगों की रसायन शास्त्र उन लोगों से अलग है जिनके पास रोग नहीं है।बार-बार असफलता, नुकसान या किसी प्रियजन की मृत्यु आदि से भी ऐसा हो सकता है।
शारीरिक रोग:
कैंसर, नि:शक्तता या कोई अन्य मर्ज जिसमें रोगी लंबे समय तक बिस्तर पर रहता है। वह इस परेशानी से ग्रसित हो सकता है।
तनाव :
कभी कभी ऐसी घटनाएं जो एक प्रिय व्यक्ति की मौत की तरह मजबूत भावनाओं को जन्म देती हैं, एक कठिन रिश्ते या अन्य स्थितियों जो तीव्र रूप से तनावपूर्ण होती हैं, अवसाद के झटके को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त हो सकती हैं।
अन्य कारण :
परिवार झगड़े, अशांति, संबंध-विच्छेद, व आर्थिक परेशानी आदि वजहों से भी ऐसा हो सकता है।
इलाज
अवसाद के साथ एक रोगी के इलाज में पहला कदम एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर या डॉक्टर से परामर्श करना है। इस यात्रा के बाद अन्य समान स्थितियों को रद्द करने के लिए परीक्षाएं और प्रयोगशाला परीक्षणों का पालन किया जा सकता है। एक मरीज़ द्वारा ली गई दवाएं भी जांच के अधीन आती हैं।
चिकित्सक रोग के विस्तृत परिवार और चिकित्सा इतिहास को ध्यान में रखता है और फिर तदनुसार एंटीड्रिप्रेसेंट्स को निर्धारित करने के लिए आगे बढ़ता है। हालांकि, दवाएं प्रभावी होने में धीमी हैं। लेकिन चिकित्सा एंटीड्रिप्रेसेंट्स के पास अक्सर गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं, जो सभी मामलों में स्वीकार्य नहीं हो सकते हैं। मनोचिकित्सा एक और विकल्प है जो अवसाद के इलाज में मदद कर सकता है। यह नए व्यवहार और सोच के तरीकों को पढ़कर काम करता है जो कुछ लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। यह व्यक्ति को अंतर्दृष्टि देता है कि अवसाद क्यों हो रहा है और स्थिति को और भी खराब कर देता है।
उपाय
जानिए डिप्रेशन से बचने में कौन से उपाय हैं बेहद कारगर -
1 परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताएं -
अत्यधिक तनाव के समय किसी से मिलने जुलने या बातें करने का बिल्कुल मन नहीं करता। लेकिन यकीन मानिए यह तरीका आपको डिप्रेशन में जाने से बचा सकता है। जब भी आपको लगे कि आप मानसिक तनाव या डिप्रेशन के शिकार हैं, अपने परिवार के लोगों या खास दोस्तों के साथ समय बिताएं और बातें करें।
2 सामाजिक सक्रियता -
सामाजिक रूप से सक्रिय रहना आपको व्यस्त भी बनाए रखेगा और तनाव के कारण की ओर से आपका ध्यान भी बंटेगा। इससे आप नकारात्मकता के शिकार न होकर अपनी ऊर्जा का सही उपयोग कर पाएंगे। कुछ समय में आप सकारात्मकता का अनुभव करेंगें।
3 नकारात्मकता से दूर रहें -
खुद को सकारात्मक बनाएं और प्रोत्साहित करें। अपनी खूबियों और अब तक की उपलब्धियों की लिस्ट बनाएं या फिर कुछ अच्छा और उपयोग कार्य करने के लिए योजना बनाएं। खुद से प्रेम करें और हर चीज को सकारात्मक नजरिए से देखें।
4 भरपूर नींद लें -
तनावग्रस्त होने पर अपनी नींद का पूरा ध्यान रखें। कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लें। नींद पूरी होगी तो दिमाग को आराम मिलेगा और वह बगैर तनाव के बेहतर तरीके से कार्य करेगा। छोटे-मोटे तनाव के लिए नींद एक बेहतरीन इलाज है।
5 धूप लें -
सुबह के समय या फिर जब भी आप सहज हों हल्की धूप जरूर लें। इससे आपका मन और मस्तिष्क को आराम मिलता है और तनाव भी दूर होता है। प्राकृतिक स्थानों पर जाएं या फिर घर के आंगन, बरामदे या बालकनी में शांत मन से बैठें।
दवा
अगर आपके डॉक्टर ने डिप्रेशन से उबरने के लिए आपको कुछ दवाओं की सलाह दी है, तो बताये गए समय पर और सही मात्रा में डोज लें। आपके डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं को लेना बंद न करें।
आप अगर प्रेगनेंट होना चाह रहे हैं या फिर प्रेगनेंट हैं, तो फिर इस स्थिति में आपके डॉक्टर से अपनी दवाओं के बारें में बात करना बेहद जरूरी है। कुछ एंटीडिप्रेसेंट आपके अजन्मे बच्चे की सेहत पर बड़े स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन सकतें है। आपको अपने डॉक्टर से बात करके अपने और बच्चे के लिए सबसे अच्छी दवाओं और बेहतरीन इलाज की तलाश करनी होगी।
कई बार डिप्रेशन दवाओं से ठीक नहीं होता है। अगर आपके लक्षणों में सुधार नहीं दिखता है तो आपका डॉक्टर आपको दूसरे ट्रीटमेंट को अपनाने की सलाह दे सकता है।
परहेज
अल्कोहल और ड्रग्स के सेवन से बचें
शराब पीना या ड्रग्स लेने से आप थोड़ी देर के लिए बेहतर महसूस कर सकते हैं। लेकिन लंबे वक्त में शरीर पर इनका निगेटिव प्रभाव ही पड़ता है। ये चीजें मिलकर आपके डिप्रेशन और एंग्जाइटी के लक्षणों को और खराब कर सकती हैं।
न कहना भी सीखें :-
अगर आप खुद को बेचैन महसूस करेंगे तो, ये एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षणों को और ज्यादा खराब कर सकता है। अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच सीमाएं तय कीजिए। इससे आप कुछ ही दिन में बेहतर महसूस करना शुरू कर देंगे।
अपना ख्याल रखें :-
आप खुद का ख्याल रखकर भी डिप्रेशन के लक्षणों से राहत पा सकते हैं। इसमें
ढेर सारी नींद
हेल्दी डाइट लेना
निगेटिव लोगों से दूर रहना
आनंद देने वाले कामों में हिस्सा लेना
शामिल है।
डिप्रेशन का एक्यूप्रेशर चिकित्सा से इलाज
मॉडर्न मेडिसिन के अलावा एक्युपंक्चर और एक्युप्रेशर भी इलाज का बेहतरीन तरीका हो सकते हैं। इनमें बेशक इलाज में ज्यादा वक्त लगता है, लेकिन कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। हमारे देश में ये सिस्टम बहुत चलन में नहीं हैं लेकिन चीन में ज्यादातर इन्हीं के जरिए इलाज किया जाता है। हालांकि अब ये तरीके अपने यहां भी इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं।
एक्युपंक्चर/एक्युप्रेशर का मतलबएक्यु चीनी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है पॉइंट, यानी अगर शरीर के कुछ खास पॉइंट्स पर सूई से पंक्चर (छेद) कर इलाज किया जाए तो एक्युपंक्चर कहलाता है और अगर उन्हीं पॉइंट्स पर हाथ से या किसी इक्युपमेंट से दबाव डाला जाए तो एक्युप्रेशर कहलाता है। अगर पैरों और हाथों के पॉइंट्स को दबाते हैं तो रिफ्लेक्सॉलजी कहलाता है, जबकि मसाज के जरिए पूरे शरीर के पॉइंट्स दबाने को शियात्सु कहते हैं। अगर एनर्जी कम है तो क्लॉकवाइज और ज्यादा है तो एंटी-क्लॉकवाइज दबाया जाता है। इसके अलावा, प्रेस और रिलीज तकनीक भी अपना सकते हैं यानी कुछ देर के लिए पॉइंट को दबाएं, फिर छोड़ दें। ऐसा बार-बार करें।
भागदौड़ भरे जीवन में तनाव होना अब आम बात है। ये तनाव यंग जनरेशन से लेकर बड़े-बुजुर्गों में भी देखने को मिल रहा है। अगर आप भी तनाव की समस्या से परेशान है तो फिटनेस एक्सपर्ट नेहा केडारे आपको शरीर के कुछ ऐसे प्रेशर पॉइंट के बारे में बताएंगी जो आपको तनाव से मुक्ति दिलाएंगे। नेहा बताती है कि एक्यूप्रेशर करने से एंडोर्फिन नामक रसायन शरीर में बनने लगता है जिससे सर्कुलेशन अच्छा होता है। यह मांसपेशियों के तनाव के साथ दिमाग के तनाव को भी शांत करता है।
वैसे तो डिप्रेशन से छुटकारा पाने के लिए पूरी बॉडी के प्वाइंट्स को दबाना चाहिए हाथो और पैरों के सभी प्वाइंट्स पर दिन में कम से कम तीन बार दबाव देना चाहिए डिप्रेशन के लिए कुछ विशेष प्वाइंट्स इस प्रकार से है :
डिप्रेशन से चाहिए छुटकारा तो जरूर दबाएं शरीर के ये 5 प्रेशर पॉइंट
सिर का प्रेशर पॉइंट
आंखों के बीच वाले बिन्दुओं पर दबाव डालने से बॉडी में मेलाटोनिन हार्मोन स्रावित होता है, जिससे अच्छी नींद आती है। इसके साथ ही तनाव पैदा करने वाला हार्मोन कार्टिसोल का स्त्राव भी नहीं होता। सिर के प्रेशर बिन्दुओं पर यदि नियमित रूप से तीन सेकण्ड तक दबाव डाला जाए तो तेज सिरदर्द से भी आराम मिलता है।
कान के पीछे
कान की नीचे वाले हिस्से यानी इयर लोब की रोजाना पांच मिनट मालिश करने से तनाव से आराम मिलता है। इसके साथ ही याद्दाश्त भी बढ़ती है। कान के पीछे के झुकाव वाले पॉइंट को दबाने से डिपे्रशन, सिरदर्द, चक्कर और आंख, कान और नाक से जुड़ी बीमारियों में राहत मिलती है।
गर्दन
गर्दन के प्रेशर पॉइंट को दबाकर भी टेंशन को दूर किया जा सकता है। गर्दन में रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर की मांसपेशियों में दबाव डालें लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि रीढ़ की हड्डी पर दबाव नहीं पड़े। मांसपेशियों पर ही ऊपर-नीचे की तरफ प्रेशर बनाने पर तनाव से राहत मिलती है।
हाथों के प्रेशर पॉइंट
हाथों की कलाई पर भी ऐसे प्रेशर पॉइंट होते हैं, जिन पर दबाव बनाने से तनाव से आराम मिलता है। दरअसल अंगुली और अंगूठे के बीच बहुत-सी मसल्स होती हैं। हाथ के दोनों तरफ प्रेशर बिंदुओं पर दबाव बनाएं। हाथ को बंद करें और खोले। इससे दबाव बिंदुओं पर दबाव पड़ेगा और तनाव से आराम मिलेगा।
पैरों पर
पैरों के प्रेशर पॉइंट को दबाने से पीठ दर्द, थकान, सिरदर्द, चिंता, तनाव और अकेलेपन में आश्चर्यजनक आराम मिलता है। पांव के तलवों पर स्थित प्रतिबिम्ब केंद्र पर दबाव देकर रक्त संचार को सुचारू किया जा सकता है। पैरों के तलवों पर दबाव बनाने से बॉडी के सभी हिस्सों को सुचारू किया जा सकता है।
तनाव दूर करने के लिए
तनाव दूर करने के लिए- हमारी आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव हमें बहुत परेशान करता है। कई बार शारीरिक क्षमता होने के बावजूद मानसिक तनाव के कारण हम कार्य को ठीक तरह से नहीं कर पाते है। ऐसे में आप अंगूठे के इस भाग को 5 मिनट तक दबाए। ये आपकी पिट्यूटरी ग्लैंड को एक्टिव करता है।
सी ऑफ ट्रेंक्वालिटी-
ये प्वाइंट चेस्ट की बीचो बीच मौजूद होता है। इस प्वाइंट पर दबाने से डिप्रेशन, नर्वसनेस और एंग्जाइटी दूर होती है।
ये प्वाइंट छाती के बीचों बीच रहता है।एंग्जाइटी












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