पलाश
परिचय
पलाश (टेशू/ढाक) में पाये जाने वाले पोषक तत्व :-
हिन्दू धर्म में महत्व :-
विभिन्न भाषाओँ में इसके नाम
पलाश के फायदे –
आयुर्वेद के अनुसार पलाश के पेड़ वात और पित्त को संतुलित करता है। इसका उपयोग आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवा में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। इस पेड़ के सभी भागों का उपयोग विभिन्न रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। इसमें एंटीमाइक्रोबायल, जीवाणुरोधी, एंटीफंगल, हाइपोग्लाइसेमिक , एंटी-इन्फ्लामेट्री, बांधने वाले गुण, टॉनिक, एफ्रोडायसियाक और मूत्रवर्धक गुण होते हैं। इन सभी गुणों के कारण पलाश हमें बहुत से स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।
आइये जाने पलाश के फायदे क्या है।
पलाश के औषधीय गुण-
नारी को गर्भ धारण करते ही अगर गाय के दूध में पलाश के कोमल पत्ते पीस कर पिलाते रहिये तो शक्तिशाली और पहलवान बालक पैदा होगा
यदि इसी पलाश के बीजों को मात्र लेप करने से नारियां अनचाहे गर्भ से बच सकती हैं
पेशाब में जलन हो रही हो या पेशाब रुक रुक कर हो रहा हो तो पलाश के फूलों का एक चम्मच रस निचोड़ कर दिन में बस 3 बार पी लीजिये
बवासीर के मरीजों को पलाश के पत्तों का साग ताजे दही के साथ खाना चाहिए लेकिन साग में घी ज्यादा चाहिए
बुखार में शरीर बहुत तेज दाहक रहा हो तो पलाश के पत्तों का रस लगा लीजिये शरीर पर 15 मिनट में सारी जलन ख़त्म हो जाती है
फीलपांव या हाथीपाँव में पलाश की जड़ के रस में सरसों का तेल मिला कर रख लीजिये बराबर मात्रा में और फिर सुबह शाम 2-2 चम्मच पीजिये
– टेशू के फूलों का रस व शहद मिलाकर लेने से या आंखों में काजल की तरह लगाने से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है।
– रतौंधी में पलाश की जड़ का अर्क आंखों में लगाने से फायदा होता है।
– रतौंधी की शुरुआत तो तो ढाक के फूलों का रस आंखों में डालने से फायदा होता है।
– आंख आने पर इसके फूलों के रस में मधु मिलाकर आंखों में लगाना चाहिए।
नेत्रों की ज्योति बढानी है तो पलाश के फूलों का रस निकाल कर उसमें शहद मिला लीजिये और आँखों में काजल की तरह लगाकर सोया कीजिए- अगर रात में दिखाई न देता हो तो पलाश की जड़ का अर्क आँखों में लगाइए
नपुंसकता की चिकित्सा के लिए भी इसके बीज काम आते हैं अन्य दवाओं में मिला के इसका प्रयोग होता है
शरीर में अन्दर कहीं गांठ उभर आयी हो तो इसके पत्तों को गर्म करके बांधिए या उनकी चटनी पीस कर गरम करके उस स्थान पर लेप कीजिए
इसके बीजों को नीबू के रस में पीस कर लगाने से दाद खाज खुजली में आराम मिलता है
इसी पलाश से एक ऐसा रसायन भी बनाया जाता है जिसके अगर खाया जाए तो बुढापा और रोग आस-पास नहीं आ सकते
इसके पत्तों से बनी पत्तलों पर भोजन करने से चाँदी के पात्र में किये गये भोजन के समान लाभ प्राप्त होते हैं पहले लोग शादी ब्याह और अन्य संस्कार में पत्तल और दोने पलाश(ढाक) का ही करते थे और आज की अपेक्षा जादा स्वस्थ थे
इसका गोंद हड्डियों को मजबूत बनाता है पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है
वसंत ऋतु में पलाश लाल फूलों से लद जाता है इन फूलों को पानी में उबालकर केसरी रंग बनायें- यह रंग पानी में मिलाकर स्नान करने से आने वाली ग्रीष्म ऋतु की तपन से रक्षा होती है तथा कई प्रकार के चर्मरोग भी दूर होते हैं
महिलाओं के मासिक धर्म में अथवा पेशाब में रूकावट हो तो फूलों को उबालकर पुल्टिस बना के पेड़ू पर बाँधें-अण्डकोषों की सूजन भी इस पुल्टिस से ठीक होती है
पलाश के बीजों में पैलासोनिन नामक तत्त्व पाया जाता है जो उत्तम कृमिनाशक है- 3 से 6 ग्राम बीज-चूर्ण सुबह दूध के साथ तीन दिन तक दें -चौथे दिन सुबह 10 से 15 मि.ली. अरण्डी का तेल गर्म दूध में मिलाकर पिलायें इससे पेट के कृमि निकल जायेंगे
पलाश के बीज+ आक (मदार) के दूध में पीसकर बिच्छूदंश की जगह पर लगाने से दर्द मिट जाता है
नाक-मल-मूत्रमार्ग अथवा योनि द्वारा रक्तस्राव होता हो तो छाल का काढ़ा (50 मि.ली.) बनाकर ठंडा होने पर मिश्री मिला के पिलायें
आयुर्वेद के अनुसार पलाश के फायदे मोतियाबिंद के उपचार को दर्शाता है। इस उद्देश्य के लिए आपको पलाश के फूलों के रस की आवश्यकता होती है या फिर आप पलाश के बीजों को पानी में भिगों कर छोड़ दें और 48 घंटों के बाद पानी से निकालकर इसका लेप बनाएं। इस पेस्ट को आप अपनी आंखों में काजल की तरह लगाएं। इस तरह आप इस पेस्ट का नियमित रूप से उपयोग कर धीरे-धीरे मोतियाबिंद के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
दाद - पलाश के बीजों को नींबू के रस के साथ पीस कर संक्रमित स्थान पर लगाने से दाद व खुजली का नाश होता है ।
घाव - पलाश की गोंद का चूर्ण घावों पर छिड़कने से घाव तुरंत भर जाते हैं।
कुष्ठ - पलाश के बीज का तेल लगाने से कुष्ठ रोग में लाभ मिलता है । दूध में उबल हुए पलाश के बीज, रस कपूर, तथा गंधक व चित्रक की शुष्क करके इसका चूर्ण बनाकर इसके 2 ग्राम मात्रा एक महीने तक प्रतिदिन लेने से मंडल कुष्ठ में फायदा होता है ।
पलाश या ढाक के फूलों का उपयोग शरीर में जलन, सूजन और मोच दूर करने के लिए किया जाता है। नीचे इसके बारे में बताया जा रहा है
सामग्री -
शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए पलाश के फूलों को उपयोग किया जा सकता है। पलाश के फूल खून साफ करने में मदद करते हैं। इसके लिए आप सूखे या ताजे फूलों का उपयोग कर सकते हैं। नीचे इसके बारे में बताया जा रहा है
सामग्री -
इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या को दूर करने और यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए, पलाश के फूल और जड़ का उपयोग किया जाता है। नीचे इसके बारे में बताया जा रहा है -
सामग्री -
पलाश का उपयोग आंखों की विभिन्न प्रकार की समस्याओं को दूर करने के लिए भी किया जा सकता है। यह मोतियाबिंद और रतौंधी जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में लाभकारी होता है। इसकी जानकारी नीचे दी जा रही है
सामग्री -
पलाश का फूल है नकसीर में उपयोगी -
पलाश का उपयोग नकसीर (नाक से खून बहना) में भी किया जा सकता है। नाक से खून निकलने के दौरान इसका उपयोग बहुत ही लाभकारी माना गया है। नीचे इसके बारे में बताया जा रहा है
सामग्री -
पलाश है पाचन सम्बन्धी समस्याओं में उपयोगी -
पलाश पेट की सूजन और पेट फूलने की समस्या को दूर करने में मदद कर सकता है। इसका उपयोग निम्न प्रकार से करें -
सामग्री -
पलाश का सेवन दिलाए पाइल्स से राहत -
पलाश का पौधा बवासीर (पाइल्स) के इलाज में भी उपयोगी है। इसके लिए,
पलाश के फूल रखें त्वचा को स्वस्थ -
पलाश आपकी त्वचा तो स्वस्थ रख सकता है। इसके लिए,
पलाश के फूल है गर्भावस्था में उपयोगी -
प्रारंभिक अवस्था का श्वेत कुष्ठ पलाश कि जड़ के चूर्ण के सेवन से ठीक हो जाता है। उसके लिए पलाश की जड़ को भली प्रकार सुखाकर उसके चूर्ण कि 5 ग्राम मात्रा जल से लेनी चाहिए। जड़ को घिसकर उस स्थान पर लगाया भी जा सकता है।
पलाश कि ताज़ा निकाली हुई छाल के काढ़े का सेवन कुछ दिनों तक करें। काढ़ा जल में बनाये .इस हेतु २०० मि. ली. जल में १० ग्राम छाल को प्रयाप्त उबालकर काढा तैयार करें।
आंखों के रोग :-
मिर्गी :-
4 से 5 बूंद टेसू की जड़ों का रस नाक में डालने से मिर्गी का दौरा बंद हो जाता है।
गलगण्ड (घेंघा) रोग :-
पलाश की जड़ को घिसकर कान के नीचे लेप करने से गलगण्ड मिटता है।
अफारा (पेट में गैस बनना) :-
पलाश की छाल और शुंठी का काढ़ा 40 मिलीलीटर की मात्रा सुबह और शाम पीने से अफारा और पेट का दर्द नष्ट हो जाता है।
उदरकृमि (पेट के कीड़े) :-
पलश के बीज, कबीला, अजवायन, वायविडंग, निसात तथा किरमानी को थोड़े सी मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर रख लें। इसे लगभग 3 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ देने से पेट में सभी तरह के कीड़े खत्म हो जाते हैं। टेसू के बीजों के चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 2 बार सेवन करने से पेट के सभी कीड़े मरकर बाहर आ जाते हैं।
प्रमेह (वीर्य विकार) :-
वाजीकरण (सेक्स पावर) :-
लिंग कि दृढ़ता हेतु
पलाश के बीजों के तेल कि हल्की मालिश लिंग पर करने से वह दृढ होता है. यदि तेल प्राप्त ना कर सकें तो पलाश के बीजों को पीसकर तिल के तेल में जला लें तथा उस तेल को छानकर प्रयोग करें .इससे भी वही परिणाम प्राप्त होते है।
स्तम्भन एवम शुक्र शोधन हेतु
इसके लिए पलाश कि गोंद घी में तलकर दूध एवम मिश्री के साथ सेवन करें . दूध यदि देसी गाय का हो तो श्रेष्ठ है।
रक्तार्श (खूनी बवासीर) :-
टेसू के पंचाग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) की राख लगभग 15 ग्राम तक गुनगुने घी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में आराम होता है। इसके कुछ दिन लगातार खाने से बवासीर के मस्से सूख जाते हैं।
अतिसार (दस्त) :-
सूजन :-
टेसू के फूल की पोटली बनाकर बांधने से सूजन नष्ट हो जाती है।
सन्धिवात (जोड़ों का दर्द) :-
टेसू के बीजों को बारीक पीसकर शहद के साथ दर्द वाले स्थान पर लेप करने से संधिवात में लाभ मिलता है।
गर्भनिरोध :-
बांझपन में
पलाश के पत्तल
पलाश के पत्तों से बने पत्तल पर नित्य कुछ दिनों तक भोजन करने से शारीरिक व्याधियों का शमन होता है। यही कारण है के प्राचीनकाल से पलाश के पत्तों से निर्मित पत्तलों पर भोजन किया जाता है।
पलाश के नुकसान -
1. पलाश बीजों में गर्भ निरोधक गुण होते हैं। जिसके कारण यह गर्भ धारण करने में बाधा पैदा कर सकता है।
2. पलाश के बीजों का प्रयोग पारंपरिक तौर पर गर्भ निरोधक के तौर पर किया जाता है।
3. इसके सेवन से कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है।
- पलाश (पलास,छूल,परसा, ढाक, टेसू, किंशुक, केसू) एक वृक्ष है जिसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलो के कारण इसे "जंगल की आग" भी कहा जाता है। पलाश का फूल उत्तर प्रदेश का राज्य पुष्प है और इसको 'भारतीय डाकतार विभाग' द्वारा डाक टिकट पर प्रकाशित कर सम्मानित किया जा चुका है।
- प्राचीन काल से ही होली के रंग इसके फूलो से तैयार किये जाते रहे है। भारत भर मे इसे जाना जाता है। एक "लता पलाश" भी होता है। लता पलाश दो प्रकार का होता है। एक तो लाल पुष्पो वाला और दूसरा सफेद पुष्पो वाला। लाल फूलो वाले पलाश का वैज्ञानिक नाम " ब्यूटिया मोनोस्पर्मा " है। सफेद पुष्पो वाले लता पलाश को औषधीय दृष्टिकोण से अधिक उपयोगी माना जाता है।
- वैज्ञानिक दस्तावेजो मे दोनो ही प्रकार के लता पलाश का वर्णन मिलता है। सफेद फूलो वाले लता पलाश का वैज्ञा निक नाम " ब्यूटिया पार्वीफ्लोरा " है जबकि लाल फूलो वाले को " ब्यूटिया सुपरबा " कहा जाता है। एक पीले पुष्पों वाला पलाश भी होता है।
परिचय
- पलाश का पेड़ मध्यम आकार का, क़रीब 12 से 15 मीटर लंबा होता है। इसका तना सीधा, अनियमित शाखाओं और खुरदुरे तने वाला होता है। इसके पल्लव धूसर या भूरे रंग के रेशमी और रोयेंदार होते हैं। छाल का रंग राख की तरह होता है। इसकी विकास दर बहुत धीमी होती है।
- छोटा पलाश का पेड़ प्रति वर्ष लगभग एक फुट तक बढ़ जाता है। पूरी तरह खिलने के बाद जब यह अपने सारे पत्ते गिरा देता है, तब ये चटक फूल प्रकृति की अनूठी रचना बनकर इस प्रकार खिल उठते हैं, मानो बेरंग मौसम में रंग भर रहे हों।
- पलाश का वृक्ष भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया के बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान, थाईलैंड, कम्बोडिया, मलेशिया, श्रीलंका और पश्चिम इंडोनेशिया में बहुतायत में देखा जा सकता है।
- इतिहास और साहित्य में गंगा-यमुना के दोआब से लेकर मध्य प्रदेश तक पलाश वृक्ष के जंगल होने की पुष्टि होती है, लेकिन 19वीं शती के प्रारंभ में इनकी तेजी से कटाई होने के कारण अब ये कहीं-कहीं ही दिखाई देते हैं।
पलाश (टेशू/ढाक) में पाये जाने वाले पोषक तत्व :-
- पलाश/ढाक की छाल और गोंद में काइनोटैनिक एसिड तथा गैलिक ऐसिड, पिच्छिल द्रव्य तथा क्षार पाये जाते है बीजों में पलासोनिन पाया जाता है। इसके अतिरिक्त पलाश में एक स्थिर तेल होता है।
- पलाश की पत्तियों में लिनोलेइक एसिड, ग्लू कोसाइड, ओलिक एसिड और लिन्गोसेरिक एसिड बहुत अच्छी मात्रा में होते हैं। पलाश की छाल में गैलिक एसिड, साइनाइडिंग, लुपेनोन, पैलेसिट्रीन, ब्यूटिन, ब्यूटोलिक एसिड, और पैलेससिमाइड शामिल होते हैं।
- पलाश की गोंद में टैनिन, पायरोटेक चिन, असंतुलित सामग्री होती है। पलाश के पुष्पों में फ्लेवोनॉयड्स, कोरोप्सिन, ट्राइटर पेन, आइसोबुट्रिन, आइसोकोरोप्सिन और सल्फरिन भी अच्छी मात्रा में पाये जाते हैं।
हिन्दू धर्म में महत्व :-
- पलाश वृक्ष अथवा 'पलास', 'परसा', 'ढाक', 'टेसू' भारत के सुंदर फूलों वाले प्रमुख वृक्षों में से एक है। प्राचीन काल से ही इस वृक्ष के फूलों से 'होली' के रंग तैयार किये जाते रहे हैं। ऋग्वेद में 'सोम', 'अश्वत्थ' तथा 'पलाश' वृक्षों की विशेष महिमा वर्णित है।
- कहा जाता है कि पलाश के वृक्ष में सृष्टि के प्रमुख देवता- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास है। अत: पलाश का उपयोग ग्रहों की शांति हेतु भी किया जाता है।
- ज्योतिष शास्त्रों में ग्रहों के दोष निवारण हेतु पलाश के वृक्ष का भी महत्त्वपूर्ण स्थान माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस वृक्ष का धार्मिक अनुष्ठानों में बहुत अधिक प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद में पलाश के अनेक गुण बताए गए हैं और इसके पाँचों अंगों- तना, जड़, फल, फूल और बीज से दवाएँ बनाने की विधियाँ दी गयी हैं।
विभिन्न भाषाओँ में इसके नाम
- पलाश (टेशू/ढाक) के विभिन्न भाषाओं में नाम
- हिंदी – पलाश,परास, ढाक, टेसू, छिडल,
- अंग्रेजी – Jungle flame, Flame of the
- संस्कृत – रक्तपुष्पक, ब्रह्मवृक्ष, पलाश, किंशुक, ब्रहापादप, याज्ञिक
- गुजराती – खाखरो
- मराठी – पलस
- बंगाली – पलाश
- पंजाबी – पलाश
- तैलगू – मोदुग
- मारवाड़ी – छिबरो
- द्राविड़ी – पैलाशं
- कन्नड़ – मुत्तुंग आदि भाषाओँ में पलाश को जाना जाता है।
पलाश के फायदे –
आयुर्वेद के अनुसार पलाश के पेड़ वात और पित्त को संतुलित करता है। इसका उपयोग आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवा में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। इस पेड़ के सभी भागों का उपयोग विभिन्न रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। इसमें एंटीमाइक्रोबायल, जीवाणुरोधी, एंटीफंगल, हाइपोग्लाइसेमिक , एंटी-इन्फ्लामेट्री, बांधने वाले गुण, टॉनिक, एफ्रोडायसियाक और मूत्रवर्धक गुण होते हैं। इन सभी गुणों के कारण पलाश हमें बहुत से स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।
आइये जाने पलाश के फायदे क्या है।
पलाश के औषधीय गुण-
- अंडकोष
अंडकोष की सूजन :-
अंडकोष और मूत्र विकार
अंडकोष और मूत्र विकार
- अंडकोष की सूजन, महिलाओं के मासिक धर्म व पेशाब में रुकावट की समस्या में टेशू के फूलों को उबालकर पुल्टिस बनाकर पेड़ू पर बांधना चाहिए।
- पलाश की छाल का छह ग्राम चूर्ण का सेवन पानी के साथ करने से अंडकोष का पानी सूख जाता है और अंडकोष छोटा हो जाता है।
- ढाक के फूलों का एक चम्मच रस पीने से पेशाब की जलन व रुक-रुक कर पेशाब आने की समस्या से छुटकारा मिलता है।
- टेसू के फूल की पोटली बनाकर नाभि के नीचे बांधने से मूत्राशय (वह स्थान जहां पेशाब एकत्रित होता हैं) के रोग समाप्त हो जाते हैं और अंडकोष की सूजन भी नष्ट हो जाती है।
- टेसू की छाल को पीसकर लगभग 4 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सुबह और शाम देने से अंडकोष का बढ़ना खत्म हो जाता है।
- यदि अंडकोष बढ़ गया हो तो पलाश की छाल का 6 ग्राम चूर्ण पानी के साथ निगल लीजिये-
- गर्भ धारण
नारी को गर्भ धारण करते ही अगर गाय के दूध में पलाश के कोमल पत्ते पीस कर पिलाते रहिये तो शक्तिशाली और पहलवान बालक पैदा होगा
- अनचाहा गर्भधारण
यदि इसी पलाश के बीजों को मात्र लेप करने से नारियां अनचाहे गर्भ से बच सकती हैं
- पेशाब में जलन
पेशाब में जलन हो रही हो या पेशाब रुक रुक कर हो रहा हो तो पलाश के फूलों का एक चम्मच रस निचोड़ कर दिन में बस 3 बार पी लीजिये
- बवासीर
बवासीर के मरीजों को पलाश के पत्तों का साग ताजे दही के साथ खाना चाहिए लेकिन साग में घी ज्यादा चाहिए
- बुखार
बुखार में शरीर बहुत तेज दाहक रहा हो तो पलाश के पत्तों का रस लगा लीजिये शरीर पर 15 मिनट में सारी जलन ख़त्म हो जाती है
- हाथीपांव
फीलपांव या हाथीपाँव में पलाश की जड़ के रस में सरसों का तेल मिला कर रख लीजिये बराबर मात्रा में और फिर सुबह शाम 2-2 चम्मच पीजिये
- आंखों के लिए लाभकारी
– टेशू के फूलों का रस व शहद मिलाकर लेने से या आंखों में काजल की तरह लगाने से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है।
– रतौंधी में पलाश की जड़ का अर्क आंखों में लगाने से फायदा होता है।
– रतौंधी की शुरुआत तो तो ढाक के फूलों का रस आंखों में डालने से फायदा होता है।
– आंख आने पर इसके फूलों के रस में मधु मिलाकर आंखों में लगाना चाहिए।
नेत्रों की ज्योति बढानी है तो पलाश के फूलों का रस निकाल कर उसमें शहद मिला लीजिये और आँखों में काजल की तरह लगाकर सोया कीजिए- अगर रात में दिखाई न देता हो तो पलाश की जड़ का अर्क आँखों में लगाइए
- नपुंसकता
नपुंसकता की चिकित्सा के लिए भी इसके बीज काम आते हैं अन्य दवाओं में मिला के इसका प्रयोग होता है
- शरीर में गांठ
शरीर में अन्दर कहीं गांठ उभर आयी हो तो इसके पत्तों को गर्म करके बांधिए या उनकी चटनी पीस कर गरम करके उस स्थान पर लेप कीजिए
- खाज खुजली
इसके बीजों को नीबू के रस में पीस कर लगाने से दाद खाज खुजली में आराम मिलता है
- बुढापा
इसी पलाश से एक ऐसा रसायन भी बनाया जाता है जिसके अगर खाया जाए तो बुढापा और रोग आस-पास नहीं आ सकते
- पत्तों से बनी पत्तलों
इसके पत्तों से बनी पत्तलों पर भोजन करने से चाँदी के पात्र में किये गये भोजन के समान लाभ प्राप्त होते हैं पहले लोग शादी ब्याह और अन्य संस्कार में पत्तल और दोने पलाश(ढाक) का ही करते थे और आज की अपेक्षा जादा स्वस्थ थे
- हड्डियों को मजबूत
इसका गोंद हड्डियों को मजबूत बनाता है पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है
- चर्मरोग
वसंत ऋतु में पलाश लाल फूलों से लद जाता है इन फूलों को पानी में उबालकर केसरी रंग बनायें- यह रंग पानी में मिलाकर स्नान करने से आने वाली ग्रीष्म ऋतु की तपन से रक्षा होती है तथा कई प्रकार के चर्मरोग भी दूर होते हैं
- मासिक धर्म
महिलाओं के मासिक धर्म में अथवा पेशाब में रूकावट हो तो फूलों को उबालकर पुल्टिस बना के पेड़ू पर बाँधें-अण्डकोषों की सूजन भी इस पुल्टिस से ठीक होती है
- पेट की कृमि
पलाश के बीजों में पैलासोनिन नामक तत्त्व पाया जाता है जो उत्तम कृमिनाशक है- 3 से 6 ग्राम बीज-चूर्ण सुबह दूध के साथ तीन दिन तक दें -चौथे दिन सुबह 10 से 15 मि.ली. अरण्डी का तेल गर्म दूध में मिलाकर पिलायें इससे पेट के कृमि निकल जायेंगे
- बिच्छू
पलाश के बीज+ आक (मदार) के दूध में पीसकर बिच्छूदंश की जगह पर लगाने से दर्द मिट जाता है
- रक्तस्राव
नाक-मल-मूत्रमार्ग अथवा योनि द्वारा रक्तस्राव होता हो तो छाल का काढ़ा (50 मि.ली.) बनाकर ठंडा होने पर मिश्री मिला के पिलायें
- मोतियाबिंद के इलाज में
आयुर्वेद के अनुसार पलाश के फायदे मोतियाबिंद के उपचार को दर्शाता है। इस उद्देश्य के लिए आपको पलाश के फूलों के रस की आवश्यकता होती है या फिर आप पलाश के बीजों को पानी में भिगों कर छोड़ दें और 48 घंटों के बाद पानी से निकालकर इसका लेप बनाएं। इस पेस्ट को आप अपनी आंखों में काजल की तरह लगाएं। इस तरह आप इस पेस्ट का नियमित रूप से उपयोग कर धीरे-धीरे मोतियाबिंद के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
- किडनी के रोग में पलाश के फायदे
- पलाश की जड़ का रस निकाल कर इसमें थोड़ी सी गेंहू भिगो कर तीन दिन के लिए रख दें । फिर इन दोनों को पीस कर हलुआ बना कर खाने से प्रमेह, शीघ्र पतन, व कमजोरी दूर होती है ।
- प्रमेह - पलाश की कोपलों को तोड़कर धूप में सुखा लें, फिर इसको कूट - छान कर इसकी 8 से 9 ग्राम मात्रा को सुबह के समय सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है ।
- टेशू के सूखी हुई कोपल, गोंद, छाल, तथा फूलों को मिलाकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर, इस चूर्ण की 2 से 4 ग्राम मात्रा को शाम को दूध के साथ सेवन करने से मूत्र खुल कर होने लगता है । मूत्र होने पर परेशानी नहीं होती है ।
- 20 ग्राम पलाश के फूलों को 200 ग्राम ठंडे पानी में रात भर के लिए भीगा रहने दें, इसमें सुबह थोड़ी मिश्री मिलाकर पिलाने से गुर्दे का दर्द व पेशाब में खून आना बंद हो जाता है ।
- त्वचा रोग में केशु के फायदे
दाद - पलाश के बीजों को नींबू के रस के साथ पीस कर संक्रमित स्थान पर लगाने से दाद व खुजली का नाश होता है ।
घाव - पलाश की गोंद का चूर्ण घावों पर छिड़कने से घाव तुरंत भर जाते हैं।
कुष्ठ - पलाश के बीज का तेल लगाने से कुष्ठ रोग में लाभ मिलता है । दूध में उबल हुए पलाश के बीज, रस कपूर, तथा गंधक व चित्रक की शुष्क करके इसका चूर्ण बनाकर इसके 2 ग्राम मात्रा एक महीने तक प्रतिदिन लेने से मंडल कुष्ठ में फायदा होता है ।
- पलाश करे सूजन कम -
पलाश या ढाक के फूलों का उपयोग शरीर में जलन, सूजन और मोच दूर करने के लिए किया जाता है। नीचे इसके बारे में बताया जा रहा है
सामग्री -
- पलाश के फूल
- पानी
- पलाश के फूलों का इस्तेमाल सूजन को कम करने के लिए कैसे करें -
- पलाश के फूल लें और भाप में।
- फूलों को भाप में पकाने के लिए एक बर्तन में पानी भर लें। और जब पानी उबलना शुरू हो जाए तो उस पर कोई जाल रखें।
- अब उस पर फूलों को रखें।
- अब सूजन वाली जगह पर इन फूलों को रखें।
- ये उपाय कितनी बार करें -
- इसे दिन में दो बार अवश्य करें।
- पलाश खून साफ करने में उपयोगी -
शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए पलाश के फूलों को उपयोग किया जा सकता है। पलाश के फूल खून साफ करने में मदद करते हैं। इसके लिए आप सूखे या ताजे फूलों का उपयोग कर सकते हैं। नीचे इसके बारे में बताया जा रहा है
सामग्री -
- पलाश के फूल
- पलाश के फूलों का इस्तेमाल विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए कैसे करें -
- पलाश के ताजे फूल लें।
- फूलों को अच्छे से सुखाएं।
- अब सूखे फूलों को बारीक पीस लें।
- अब आप इस तैयार पाउडर का उपयोग कर सकते हैं।
- ये उपाय कितनी बार करें -
- 1 -2 ग्राम मात्रा में, दिन में एक बार जरूर इस पाउडर का सेवन करें।
- पलाश करे इरेक्टाइल डिस्फंक्शन दूर -
इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या को दूर करने और यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए, पलाश के फूल और जड़ का उपयोग किया जाता है। नीचे इसके बारे में बताया जा रहा है -
सामग्री -
- पलाश के फूल
- पलाश की जड़
- मिश्री
- दूध
- पलाश के फूलों का इस्तेमाल यौन शक्ति को बढ़ाने और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या दूर करने के लिए कैसे करें -
- पलाश के सूखे फूल लें और इनका चूर्ण बनाएं।
- इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या को दूर करने के लिए दिन में दो बार मिश्री और दूध के साथ सेवन करें।
- इसके अलावा इसकी जड़ के अर्क की 5-6 बूंदों का सेवन करें। फूलों को अच्छे से सूखाएं।
- अब सूखे फूलों को अच्छे से बारीक पीस लें।
- यह वीर्य का अनैच्छिक प्रवाह रोकता है और यौन शक्ति भी बढ़ाता है।
पलाश है आँखों की समस्याएं दूर करने में उपयोगी -
पलाश का उपयोग आंखों की विभिन्न प्रकार की समस्याओं को दूर करने के लिए भी किया जा सकता है। यह मोतियाबिंद और रतौंधी जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में लाभकारी होता है। इसकी जानकारी नीचे दी जा रही है
सामग्री -
- पलाश की जड़ का अर्क
- पलाश का इस्तेमाल आंखों की समस्याओं को दूर करने के लिए कैसे करें -
- पलाश की जड़ का अर्क नियमित रूप से आँखों में डालें।
- यह उपाय आंखों की हर प्रकार की समस्या को ठीक करने में मदद कर सकता है।
पलाश का फूल है नकसीर में उपयोगी -
पलाश का उपयोग नकसीर (नाक से खून बहना) में भी किया जा सकता है। नाक से खून निकलने के दौरान इसका उपयोग बहुत ही लाभकारी माना गया है। नीचे इसके बारे में बताया जा रहा है
सामग्री -
- 5-7 पलाश के फूल
- पानी
- चीनी
- पलाश के फूलों का इस्तेमाल नकसीर की समस्या दूर करने के लिए कैसे करें -
- पलाश के पत्ते लें।
- फूलों को पानी में पूरी रात भिगो कर रखें।
- अगली सुबह इस घोल को छान लें और स्वाद के अनुसार चीनी मिला लें।
- रोगी को इसका सेवन कराएं।
- इस उपाय से नाक से खून बहना रूक जाता है।
पलाश है पाचन सम्बन्धी समस्याओं में उपयोगी -
पलाश पेट की सूजन और पेट फूलने की समस्या को दूर करने में मदद कर सकता है। इसका उपयोग निम्न प्रकार से करें -
सामग्री -
- पलाश की छाल
- पानी
- अदरक का पाउडर
- पलाश का इस्तेमाल पेट की सूजन दूर करने के लिए कैसे करें -
- पलाश की छाल और सूखे अदरक को पानी में अच्छे से उबाल लें।
- जब इसका काढ़ा तैयार हो तो इससे छान लें।
- आप इस काढ़े का उपयोग पेट की सूजन (जो अक्सर अपच के कारण होती है) को कम करने के लिए बहुत ही उपयोगी होता है।
पलाश का सेवन दिलाए पाइल्स से राहत -
पलाश का पौधा बवासीर (पाइल्स) के इलाज में भी उपयोगी है। इसके लिए,
- पलाश के पौधे की 10-20 ग्राम राख लें और इसे गर्म घी के साथ मिलाकर रोगी को दें।
- यह खूनी पाइल्स में लाभकारी होता है।
- इसके अलावा आप पलाश की ताजा पत्तियां लें और इन पत्तियों पर घी लगा लें।
- अब इन पत्तियों को रोगी को दही के साथ दें।
पलाश के बीज दस्त में लाभकारी हैं।
- 625 मिलीग्राम से लेकर 2 ग्राम तक गोंद लें और इसमें थोड़ी से मात्रा में दालचीनी और बहुत कम मात्रा में खसखस मिला लें।
- यह मिश्रण को रोगी को दें।
- यह दस्त के लिए एक तत्काल इलाज के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
- इसके अलावा आप एक दिन में तीन बार भोजन के बाद, एक चम्मच बकरी के दूध के साथ एक चम्मच पलाश के बीज के काढ़े का सेवन करें।
- यह उपाय दस्त में फायदेमंद होता है।
- इस उपचार के दौरान, केवल बकरी का दूध और चावल का ही सेवन करना चाहिए।
पलाश के फूल रखें त्वचा को स्वस्थ -
पलाश आपकी त्वचा तो स्वस्थ रख सकता है। इसके लिए,
- पलाश के पूरे पौधे को छाया में सुखाएं और पीस लें। अब एक चम्मच चूर्ण घी और शहद में मिला लें।
- इस मिश्रण का दिन में दो बार सेवन करें।
- यह उपाय किसी भी व्यक्ति को बीमारी और विकार से मुक्त और स्वस्थ बना सकता है।
- इसके अलावा यह एंटी एजिंग के लिए भी बहुत ही अच्छा उपाय है।
- इसके अलावा आप नींबू के रस को पलाश के बीज के साथ पीसकर प्रभावित क्षेत्र पर लगा सकते हैं।
- यह एक्जिमा और खुजली का इलाज करने के लिए बहुत ही लाभकारी उपाय होता है।
पलाश के फूल है गर्भावस्था में उपयोगी -
- गाय के दूध में इसकी मुलायम और ताजा पत्तियों को अच्छे से पीस लें।
- इस मिश्रण को गर्भवती महिला को 2 चम्मच पेस्ट गाय के दूध के साथ खिलाएँ।
- यह एक स्वस्थ बच्चे के जन्म में बहुत मदद करता है।
- छाल : नाक, मल-मूत्र मार्ग या योनि द्वारा रक्तस्त्राव होता हो तो छाल का काढ़ा (50 मि.ली.) बनाकर ठंडा होने पर मिश्री मिला के पिलायें।
- पलाश का गोंद : पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध या आँवला रस के साथ लेने से बल-वीर्य की वृद्धी होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं। यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है।
- श्वेत कुष्ठ उपचार में
प्रारंभिक अवस्था का श्वेत कुष्ठ पलाश कि जड़ के चूर्ण के सेवन से ठीक हो जाता है। उसके लिए पलाश की जड़ को भली प्रकार सुखाकर उसके चूर्ण कि 5 ग्राम मात्रा जल से लेनी चाहिए। जड़ को घिसकर उस स्थान पर लगाया भी जा सकता है।
- रक्त एवम पित्त विकार में
पलाश कि ताज़ा निकाली हुई छाल के काढ़े का सेवन कुछ दिनों तक करें। काढ़ा जल में बनाये .इस हेतु २०० मि. ली. जल में १० ग्राम छाल को प्रयाप्त उबालकर काढा तैयार करें।
आंखों के रोग :-
- पलाश की ताजी जड़ का 1 बूंद रस आंखों में डालने से आंख की झांक, खील, फूली मोतियाबिंद तथा रतौंधी आदि प्रकार के आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं।
- पलाश की जड़ का प्रयोग रतौंधी (रात में दिखाई न देना) को ठीक करने, आंख की सूजन को नष्ट करने तथा आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
मिर्गी :-
4 से 5 बूंद टेसू की जड़ों का रस नाक में डालने से मिर्गी का दौरा बंद हो जाता है।
गलगण्ड (घेंघा) रोग :-
पलाश की जड़ को घिसकर कान के नीचे लेप करने से गलगण्ड मिटता है।
अफारा (पेट में गैस बनना) :-
पलाश की छाल और शुंठी का काढ़ा 40 मिलीलीटर की मात्रा सुबह और शाम पीने से अफारा और पेट का दर्द नष्ट हो जाता है।
उदरकृमि (पेट के कीड़े) :-
पलश के बीज, कबीला, अजवायन, वायविडंग, निसात तथा किरमानी को थोड़े सी मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर रख लें। इसे लगभग 3 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ देने से पेट में सभी तरह के कीड़े खत्म हो जाते हैं। टेसू के बीजों के चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 2 बार सेवन करने से पेट के सभी कीड़े मरकर बाहर आ जाते हैं।
प्रमेह (वीर्य विकार) :-
- पलाश की मुंहमुदी (बिल्कुल नई) कोपलों को छाया में सुखाकर कूट-छानकर गुड़ में मिलाकर लगभग 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से प्रमेह नष्ट हो जाता है।
- टेसू की जड़ का रस निकालकर उस रस में 3 दिन तक गेहूं के दाने को भिगो दें। उसके बाद दोनों को पीसकर हलवा बनाकर खाने से प्रमेह, शीघ्रपतन (धातु का जल्दी निकल जाना) और कामशक्ति की कमजोरी दूर होती है।
वाजीकरण (सेक्स पावर) :-
- 5 से 6 बूंद टेसू के जड़ का रस प्रतिदिन 2 बार सेवन करने से अनैच्छिक वीर्यस्राव (शीघ्रपतन) रुक जाता है और काम शक्ति बढ़ती है।
- टेसू के बीजों के तेल से लिंग की सीवन सुपारी छोड़कर शेष भाग पर मालिश करने से कुछ ही दिनों में हर तरह की नपुंसकता दूर होती है और कामशक्ति में वृद्धि होती है।
लिंग कि दृढ़ता हेतु
पलाश के बीजों के तेल कि हल्की मालिश लिंग पर करने से वह दृढ होता है. यदि तेल प्राप्त ना कर सकें तो पलाश के बीजों को पीसकर तिल के तेल में जला लें तथा उस तेल को छानकर प्रयोग करें .इससे भी वही परिणाम प्राप्त होते है।
स्तम्भन एवम शुक्र शोधन हेतु
इसके लिए पलाश कि गोंद घी में तलकर दूध एवम मिश्री के साथ सेवन करें . दूध यदि देसी गाय का हो तो श्रेष्ठ है।
रक्तार्श (खूनी बवासीर) :-
टेसू के पंचाग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) की राख लगभग 15 ग्राम तक गुनगुने घी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में आराम होता है। इसके कुछ दिन लगातार खाने से बवासीर के मस्से सूख जाते हैं।
अतिसार (दस्त) :-
- टेसू के गोंद लगभग 650 मिलीग्राम से लेकर 2 ग्राम तक लेकर उसमें थोड़ी दालचीनी और अफीम (चावल के एक दाने के बराबर) मिलाकर खाने से दस्त आना बंद हो जाता है।
- टेसू के बीजों का क्वाथ (काढ़ा) एक चम्मच, बकरी का दूध 1 चम्मच दोनों को मिलाकर खाने के बाद दिन में 3 बार खाने से अतिसार में लाभ मिलता है।
सूजन :-
टेसू के फूल की पोटली बनाकर बांधने से सूजन नष्ट हो जाती है।
सन्धिवात (जोड़ों का दर्द) :-
टेसू के बीजों को बारीक पीसकर शहद के साथ दर्द वाले स्थान पर लेप करने से संधिवात में लाभ मिलता है।
गर्भनिरोध :-
- टेसू के बीजों को जलाकर राख बना लें और इस राख से आधी मात्रा हींग को इसमें मिलाकर रख लें। इसमें से तीन ग्राम तक की मात्रा ऋतुस्राव (माहवारी) प्रारंभ होते ही और उसके कुछ दिन बाद तक सेवन करने से स्त्री की गर्भधारण करने की शक्ति खत्म हो जाती है।
- टेसू के बीज दस ग्राम, शहद बीस ग्राम और घी 10 ग्राम सब को मिलाकर इसमें रुई को भिगोकर बत्ती बना लें और इसे स्त्री प्रसंग से 3 घंटे पूर्व योनिभाग में रखने से गर्भधारण नहीं होता है।
बांझपन में
- बांझपन में पलाश कि फली को सुखाकर जलाकर इसकी राख बना लें .इस राख को देसी गाय के दूध के साथ सेवन करने से बांझपन दूर होता है .
- ढाक पलाश का पत्ता भी गर्भधारण करने में बहुत सहयोगी हैं। गर्भधारण के पहले महीने १ पत्ता, दूसरे महीने २ पत्ते, इसी प्रकार नौवे महीने ९ पत्ते ले कर १ गिलास दूध में पकाकर प्रात: सांय लेना चाहिए। ये प्रयोग जिन्होंने भी किया हैं उनको चमत्कारिक फायदा हुआ हैं।
पलाश के पत्तल
पलाश के पत्तों से बने पत्तल पर नित्य कुछ दिनों तक भोजन करने से शारीरिक व्याधियों का शमन होता है। यही कारण है के प्राचीनकाल से पलाश के पत्तों से निर्मित पत्तलों पर भोजन किया जाता है।
पलाश के नुकसान -
1. पलाश बीजों में गर्भ निरोधक गुण होते हैं। जिसके कारण यह गर्भ धारण करने में बाधा पैदा कर सकता है।
2. पलाश के बीजों का प्रयोग पारंपरिक तौर पर गर्भ निरोधक के तौर पर किया जाता है।
3. इसके सेवन से कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है।







Comments
Post a Comment